दहेज की बलि चढ़ी बेटी — सोनी कुमारी हत्याकांड की दर्दनाक कहानी

Date:

स्थान: मधेपुरा, बिहार
तारीख: 1 नवम्बर 2025

मधेपुरा जिले के अरार थाना क्षेत्र से एक हृदय विदारक घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। तीन साल पहले शादी के बंधन में बंधी सोनी कुमारी उर्फ नेहा की ससुराल वालों ने कथित रूप से हत्या कर दी और सबूत मिटाने के लिए उसके शव को जला दिया।

मृतका सोनी कुमारी की शादी लगभग तीन वर्ष पूर्व सहरसा जिले के सोनवर्षा कचहरी थाना क्षेत्र के ग्राम बबुअन पार निवासी सत्तो पासवान की पुत्री के रूप में बीर गांव, वार्ड नंबर 5 निवासी अमरेश कुमार से हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार की गई थी। विवाह के समय गरीब पिता ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार एक मोटरसाइकिल, सोने की चेन और अन्य घरेलू सामान दहेज में दिया था।

लेकिन शादी के कुछ ही महीनों बाद से ही ससुराल पक्ष ने सोनी पर अतिरिक्त दो लाख रुपये दहेज लाने का दबाव डालना शुरू कर दिया। पीड़िता ने कई बार अपने पिता को फोन पर बताया कि, “अगर पैसे नहीं लाई तो ये लोग मुझे मार डालेंगे।” पिता सत्तो पासवान ने कई बार ससुराल जाकर विनती की कि वे गरीब मजदूर हैं और अब कुछ देने में असमर्थ हैं, लेकिन ससुराल पक्ष ने उनकी एक न सुनी।

घटना का दिन — 2 नवम्बर 2025:
घटना 1 नवम्बर की रात को हुई थी। आसपास के लोगों ने जब शोर सुना और आग की लपटें देखीं, तो उन्हें कुछ अनहोनी का अंदेशा हुआ। सूचना मिलते ही सोनी के मायके वालों को खबर दी गई। जब सत्तो पासवान और परिवार वाले 2 नवम्बर की सुबह बेटी के ससुराल पहुँचे, तो देखा कि पूरा परिवार घर से फरार था। घर के पीछे जले हुए अवशेष और आग के निशान साफ दिखाई दे रहे थे। ग्रामीणों ने बताया कि हत्या के बाद सबूत मिटाने के लिए सोनी के शव को जलाया गया।

इस बीच, कुछ लोगों ने बताया कि जब सोनी के पिता वहाँ पहुँचे, तो उसका पति अमरेश कुमार भाग रहा था। ग्रामीणों ने उसे पकड़ लिया और पुलिस प्रशासन को सौंप दिया, जबकि बाकी सभी आरोपी अब भी फरार हैं।

सूचना मिलते ही अरार थाना पुलिस मौके पर पहुँची और कांड संख्या 770/25, दिनांक 02-11-2025 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 80/238/3(5) में मामला दर्ज किया गया।

नामजद अभियुक्त:

अमरेश कुमार (पति)

विरेंद्र पासवान (ससुर)

उषा देवी (सास)

मुन्नी देवी (ननद)

राजेश पासवान (देवर)

पीड़ित परिवार का आरोप है कि इस पूरे प्रकरण में विरेंद्र पासवान का मंजिला बेटा अमित कुमार और उसकी पत्नी काजल कुमारी भी बराबर शामिल थे। स्थानीय लोगों के अनुसार, “सोनी की हत्या की साजिश में अमित का भी हाथ है, लेकिन पुलिस उसे बचा रही है।” ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस को पैसा देकर अमित का नाम प्राथमिकी में शामिल नहीं किया गया।

कुछ चश्मदीदों का कहना है कि सोनी कुमारी की मृत्यु तत्काल नहीं हुई थी, बल्कि उसे जिंदा ही आग के हवाले कर दिया गया ताकि वह कुछ बोल न सके और सबूत मिट जाएं।

पीड़ित पिता की गुहार:
सत्तो पासवान ने जिला प्रशासन और पुलिस विभाग से न्याय की गुहार लगाई है। उनका कहना है—
“मेरी बेटी को सिर्फ दहेज के लिए जिंदा जला दिया गया। अगर दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा नहीं मिली, तो और भी बेटियां इसी तरह दहेज की बलि चढ़ जाएंगी।”

यह घटना एक बार फिर समाज के उस काले चेहरे को उजागर करती है, जहाँ आज भी बेटियों की ज़िंदगी दहेज की आग में झोंक दी जाती है। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन इस पीड़ित पिता को न्याय दिला पाएगा या यह भी किसी और ‘दहेज हत्या’ की फाइलों में गुम हो जाएगी।

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