नायगांव में विवाहिता प्रियंका पर ससुराल वालों की मारपीट, धमकी और बच्चे को छीनने का आरोप

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पुलिस कार्रवाई न मिलने पर माँ–बेटी ने मीडिया से लगाई गुहार

नायगांव (पूर्व)। 24 वर्षीय विवाहिता प्रियंका यादव ने अपने पति सुरज शंकर पवार और ससुराल पक्ष पर गंभीर घरेलू हिंसा, गाली-गलौज, जान से मारने की धमकी और बच्चे को छीनने की कोशिश जैसे संगीन आरोप लगाए हैं। पीड़िता और उसकी माँ अमरावती यादव का कहना है कि कई शिकायतों के बावजूद पुलिस ने उनकी सुनवाई नहीं की, जिसके चलते अब वे मीडिया के सामने अपनी बात रखने को मजबूर हैं।

प्रेम विवाह के बाद बदल गया परिवार का व्यवहार
प्रियंका का विवाह फरवरी 2025 में चांद्रा कोर्ट में प्रेम विवाह के रूप में हुआ था। शुरुआत में सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन महीने भर बाद ही ससुराल वालों का व्यवहार बदलने लगा। प्रियंका का कहना है कि सास, ससुर और ननद के उकसाने पर पति अक्सर उस पर हाथ उठाता था। गर्भ के चौथे महीने में भी कथित रूप से मारपीट की गई। पैसों की मांग और दखल-अंदाजी के साथ लगातार मानसिक दबाव बनाया जाता रहा।

22 अक्टूबर की घटना – गैस सिलेंडर खोलकर पूरे परिवार को जला देने की धमकी
शिकायत के अनुसार 22 अक्टूबर को प्रियंका की सास ने उसे मामूली बात पर ताने देकर झगड़ा शुरू किया। उसके बाद पति ने उसकी पिटाई की। प्रियंका ने अपनी माँ को कॉल किया। थोड़ी देर बाद पति ने खुद फोन कर “समझाने” के बहाने माँ और छोटी बहन को घर बुलाया।
अमरावती और उसकी छोटी बेटी जब घर पहुँचीं, तो उनके साथ भी गाली-गलौज और धक्का-मुक्की की गई। इसी दौरान घर के भीतर गैस सिलेंडर खोलकर उन्हें जलाने की धमकी दी गई। डर के माहौल में तीनों किसी तरह घर से निकल पाए और तुरंत 100 नंबर पर कॉल किया

ससुराल वालों ने बेटी का ‘सारा’ गहना छीन लिया, बच्चे को भी छीनने की कोशिश
अमरावती यादव का आरोप है कि जब वे घायल प्रियंका और उसके दो महीने के बच्चे को लेकर घर से बाहर निकल रही थीं, तभी सास ने प्रियंका का पूरा ‘सारा’ (कपड़े, सामान, जरूरी चीजें) छीन लिया। इतना ही नहीं, बच्चे को भी उनसे छीनने की कोशिश की गई ताकि बेटी को खाली हाथ भेजा जा सके।
पहले बच्चे के समय ससुराल पक्ष ने कोई साथ नहीं दिया। बच्चे के जन्म के दो महीने भी पूरे नहीं हुए थे कि प्रियंका पर दूसरा बच्चा पैदा करने का दबाव डाला जाने लगा, जबकि पहले बच्चे की परवरिश तक की कोई जिम्मेदारी नहीं ली गई।

पुलिस पर लापरवाही का आरोप – “आज भाईदूज है, कल आना”
अमरावती यादव ने बताया कि घटना की रात जब वे पुलिस स्टेशन पहुँचे, तो ड्यूटी पर मौजूद कर्मियों ने त्योहार का हवाला देते हुए कहा कि “आज भाईदूज है, कल आना।” अगले दिन भी कोई ठोस एक्शन नहीं लिया गया। सिर्फ उन्हें भरोसा सेल भेज दिया गया।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि कई बार गुहार लगाने के बावजूद पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया।

काउंसलिंग में प्रियंका ने कहा – पति के साथ अब नहीं रहना
13 नवंबर को भरोसा सेल में हुए परामर्श सत्र में प्रियंका ने स्पष्ट कहा कि वह पिछले तीन महीनों से मायके में रह रही है और अब पति के साथ वापस नहीं जाना चाहती।
उसका कहना है कि पति लगातार उससे माफी मँगवाने का दबाव डालता था और मानसिक रूप से प्रताड़ित करता था। काउंसलिंग में प्रियंका ने लिखित बयान दिया कि वह अब पति से तलाक और बच्चे के भरण-पोषण के लिए कोर्ट का सहारा लेगी।

मीडिया के सामने माँ–बेटी भावुक – “हम थक चुके हैं, अब न्याय चाहिए”
प्रियंका और उसकी माँ ने मीडिया के सामने कहा कि उन्होंने पुलिस से कई बार मदद माँगी, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई।
दोनों का कहना है कि वे अपने छोटे बच्चे के साथ लगातार डर में जी रही हैं और अब उन्हें न्याय और सुरक्षा की जरूरत है।
अमरावती ने कहा कि “हमारी बात कोई सुनने को तैयार नहीं था। मजबूर होकर मीडिया के पास आए हैं ताकि हमारी बेटी की आवाज सब तक पहुँचे। हम बस चाहते हैं कि दोषियों पर कार्रवाई हो और मेरी बेटी तथा नाती की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।”

जाँच और भरण-पोषण की व्यवस्था की मांग
अमरावती यादव ने पुलिस प्रशासन, भरोसा सेल और जिला अधिकारियों से मांग की है कि पूरे मामले की व्यापक जांच की जाए, ससुराल पक्ष पर उचित कार्रवाई की जाए और बच्चे के भविष्य को देखते हुए भरण-पोषण की उचित व्यवस्था की जाए।
परिवार का कहना है कि जब तक उन्हें सुरक्षा का भरोसा नहीं मिलता, वे न्याय की लड़ाई जारी रखेंगे।

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