अररिया/फारबिसगंज।
फारबिसगंज थाना क्षेत्र के रंगदाहा बिरनी टोला से सामने आया मामला महिला सुरक्षा, पुलिस कार्रवाई और न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। 30 वर्षीय जुमनी खातुन ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2008 में उसके साथ रास्ते में जबरन दुष्कर्म किया गया, वीडियो बनाया गया और उसे वायरल करने की धमकी देकर वर्षों तक मानसिक प्रताड़ना दी गई। पीड़िता के अनुसार, बाद के वर्षों में भी आरोपियों ने दबाव बनाना नहीं छोड़ा और केस उठाने के लिए लगातार धमकियां दी जाती रहीं।
पीड़िता का कहना है कि जून 2025 में मामला और भयावह हो गया, जब आरोपियों ने उसके घर में घुसकर तोड़फोड़ की, मारपीट की और नकदी व चांदी की चेन लूट ली। हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गई, जबकि उसके पति के साथ भी मारपीट की गई। पीड़िता के मुताबिक, हमलावरों ने खुलेआम धमकी दी कि यदि मुकदमा वापस नहीं लिया गया तो जान से मार देंगे। घटना के बाद अस्पताल में इलाज हुआ और थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
मामले में पुलिस जांच पर भी सवाल उठ रहे हैं। पीड़िता का आरोप है कि गवाहों के बयान और मेडिकल साक्ष्य के बावजूद आरोपियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी के चलते पीड़िता ने न्यायालय में प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल की है और अनुसंधान में लापरवाही का आरोप लगाया है। न्यायालय ने शांति भंग की आशंका को देखते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर बंधपत्र भरने का आदेश दिया है।
पीड़िता का कहना है कि आरोपी प्रभावशाली हैं और थाना-कचहरी के चक्कर लगाते रहते हैं, जिससे उसे और उसके परिवार को लगातार भय में जीना पड़ रहा है। उसने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि उसे और उसके परिवार को सुरक्षा मिल सके और न्याय सुनिश्चित हो।
यह मामला एक बार फिर बताता है कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों में त्वरित कार्रवाई और पीड़ितों की सुरक्षा कितनी जरूरी है। अब निगाहें पुलिस और न्यायपालिका पर टिकी हैं कि पीड़िता को कब और कैसे इंसाफ मिलता है।
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