रांची।
राजधानी रांची के कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित एक निजी अस्पताल में विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। पहले महिला से कथित मारपीट और बदसलूकी का मामला सामने आया, अब पीड़ित परिवार ने अस्पताल प्रबंधन पर उनके मासूम पोते का इलाज रोकने और जबरन डिस्चार्ज करने का दबाव बनाने का आरोप लगाया है। मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
शिकायतकर्ता फरजाना परवीन (32) का आरोप है कि 12 फरवरी 2026 को अस्पताल परिसर में तैनात एक गार्ड ने उनके साथ धक्का-मुक्की की और गला दबाने की कोशिश की। महिला का कहना है कि वह अपनी बहू को बच्चे के लिए पैम्पर्स खरीदने हेतु पैसे देने जा रही थीं, तभी कुर्सी पर बैठने को लेकर विवाद हुआ। विरोध करने पर गार्ड ने कथित रूप से उन्हें धक्का दिया, जिससे वह गिर पड़ीं। उन्होंने गले और शरीर में चोट लगने की शिकायत की है और इस संबंध में कोतवाली थाना में लिखित शिकायत दी है।
अब पीड़िता ने नया आरोप लगाया है कि घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन ने उनके परिवार पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। फरजाना का कहना है कि उनका पोता 19 जनवरी 2026 से अस्पताल में भर्ती है और इलाज जारी है। भर्ती के समय सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की गई थीं और भुगतान भी किया गया था। इसके बावजूद अब अस्पताल कर्मी कथित रूप से कह रहे हैं कि “अपने पोते को यहां से ले जाओ, हम इलाज नहीं करेंगे।”
परिवार का कहना है कि बच्चा बहुत छोटा है और उसकी तबीयत नाजुक है। ऐसे समय में इलाज रोकने या जबरन अस्पताल छोड़ने का दबाव बनाना अमानवीय है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि वे पहले से ही मानसिक और आर्थिक दबाव में हैं, और अब इस तरह की चेतावनी से उनकी चिंता और बढ़ गई है।
फरजाना परवीन ने प्रशासन से मांग की है कि अस्पताल प्रबंधन और संबंधित गार्ड के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए तथा उनके पोते का इलाज बिना किसी बाधा के जारी रखा जाए। उन्होंने कहा कि एक मरीज के परिजन के साथ मारपीट और उसके बाद इलाज से इंकार करना गंभीर मामला है।
स्वास्थ्य अधिकार से जुड़े जानकारों का कहना है कि भर्ती मरीज का इलाज बीच में रोकना या दबाव बनाना चिकित्सा आचार संहिता के विरुद्ध माना जाता है। अब देखना होगा कि कोतवाली थाना पुलिस और स्वास्थ्य विभाग इस पूरे मामले में क्या कदम उठाते हैं और अस्पताल प्रबंधन की ओर से क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है।

