दहेज की मांग पर हैवानियत: गर्भपात कराया, मारपीट कर घर से निकाला; पति समेत 5 पर परिवाद

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बगहा/नौरंगिया। पश्चिमी चम्पारण के नौरंगिया थाना क्षेत्र में दहेज की मांग को लेकर एक नवविवाहिता के साथ कथित तौर पर अमानवीय व्यवहार का मामला सामने आया है। पीड़िता सुनिता देवी (22) ने अपर मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी प्रथम, बगहा की अदालत में परिवाद संख्या 596/2025 दायर कर पति समेत ससुराल पक्ष के पांच लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अदालत ने मामले को संज्ञान में लेते हुए आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

शादी में 5 लाख से अधिक खर्च, फिर भी 2 लाख और बाइक की मांग

परिवाद के अनुसार, सुनिता की शादी 21 जून 2021 को हिंदू रीति-रिवाज से उमेश निषाद के साथ हुई थी। मायके पक्ष ने शादी में करीब 3 लाख रुपये नगद और लगभग 2 लाख रुपये के गहने, कपड़े, फर्नीचर व बर्तन उपहार स्वरूप दिए थे। आरोप है कि शादी के छह माह बाद से ही ससुराल वाले अतिरिक्त 2 लाख रुपये और एक मोटरसाइकिल की मांग करने लगे। पीड़िता के अनुसार, पिता की आर्थिक स्थिति कमजोर होने की बात कहने पर उसे ताने दिए गए और शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना शुरू कर दी गई।

इलाज और देखभाल बंद, गर्भपात कराने का आरोप

परिवाद में कहा गया है कि प्रताड़ना के दौरान पीड़िता के दवा-इलाज, खान-पान और देखभाल तक में लापरवाही बरती गई। दंपती से एक पुत्र और एक पुत्री का जन्म हुआ। इसके बाद जब वह दोबारा गर्भवती हुई तो आरोप है कि पति और सास ने उसे गर्भनाशक दवा खिलाकर तीन माह का गर्भ गिरा दिया। विरोध करने पर 7 जुलाई 2025 को सुबह करीब 11 बजे उसके साथ मारपीट की गई, स्त्रीधन छीन लिया गया और घर से निकाल दिया गया। धमकी दी गई कि दहेज की रकम और मोटरसाइकिल लेकर ही लौटना, अन्यथा जान से मार देंगे।

स्थानीय थाना पर कार्रवाई न करने का आरोप

पीड़िता का कहना है कि घटना की सूचना स्थानीय थाने में दी गई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। पंचायत के प्रयासों के बाद भी जब समाधान नहीं निकला तो उसने न्यायालय की शरण ली। मामले में उमेश निषाद, रामाकांत निषाद, सोनमती देवी, रीमा कुमारी और सीमा कुमारी को आरोपी बनाया गया है। सभी उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के हिरनाहा गांव के निवासी बताए गए हैं।

गवाहों के बयान और कानूनी धाराएं

परिवाद में पांच गवाहों के नाम दर्ज हैं, जो नौरंगिया क्षेत्र के निवासी हैं। आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता की धाराएं 115(2), 126(2), 85, 352, 351(2) तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/4 के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। अदालत से दोषियों को दंडित कर न्याय दिलाने की गुहार लगाई गई है।

मामले ने इलाके में दहेज प्रथा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो यह न केवल घरेलू हिंसा बल्कि महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े गंभीर अपराध की श्रेणी में आएगा।

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