उन्नाव, हसनगंज तहसील।
जिले के हसनगंज तहसील क्षेत्र के ग्राम कोरौरा में जमीन विवाद को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। न्यायालय द्वारा यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिए जाने के बावजूद दबंगों द्वारा निर्माण कार्य शुरू कराने और विरोध करने पर जातिसूचक गालियां देते हुए जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगा है। पीड़ित ने उपजिलाधिकारी और पुलिस से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम कोरौरा निवासी ओमकार पुत्र स्व. शीतल प्रसाद अपने भाइयों मिथलेश कुमार, शत्रुहन और रिश्तेदार राजकुमार उर्फ रामकुमार के साथ खाता संख्या 00391 की भूमि गाटा संख्या 699 रकबा 0.0890 हेक्टेयर तथा गाटा संख्या 702 रकबा 0.0760 हेक्टेयर के सहखातेदार और कब्जेदार हैं। यह भूमि गांव से जाने वाले खड़ंजा मार्ग के किनारे स्थित है, जिस पर एक हिस्से में मकान बना हुआ है तथा शेष भूमि पर खेती की जाती है।
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि गांव के ही संदीप सिंह पुत्र रामप्रताप सिंह इस भूमि पर जबरन कब्जा कर मकान बनाना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने सड़क किनारे ईंट, मौरंग और अन्य निर्माण सामग्री भी जमा कर ली। 25 सितंबर 2025 को संदीप सिंह मजदूरों के साथ मौके पर पहुंचे और जबरदस्ती विवादित भूमि पर नींव खोदने का प्रयास करने लगे। हालांकि पीड़ित पक्ष के विरोध के कारण उस समय निर्माण कार्य नहीं हो सका, लेकिन जाते समय आरोपियों ने खुलेआम धमकी दी कि वे किसी भी हाल में जमीन पर कब्जा कर निर्माण करेंगे।
घटना के बाद ओमकार व अन्य सहखातेदारों ने न्यायालय सिविल जज (जू०डि०) उत्तरी उन्नाव में स्थायी निषेधाज्ञा का वाद संख्या 772/2025 दायर किया। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। इसके बावजूद आरोप है कि 22 दिसंबर 2025 की सुबह करीब 8 बजे संदीप सिंह अपने भाई कुलदीप सिंह और पिता रामप्रताप सिंह के साथ मौके पर पहुंच गए और निर्माण कार्य शुरू करा दिया।
पीड़ित ओमकार का कहना है कि जब उन्होंने न्यायालय के स्टे आदेश की जानकारी देते हुए निर्माण रोकने को कहा तो आरोपियों ने मां-बहन की गालियां देते हुए जातिसूचक अपमान किया और कहा कि वे किसी भी अदालत के आदेश को नहीं मानते। इतना ही नहीं, आरोपियों ने धमकी दी कि यदि दोबारा विरोध किया तो खेत में ही मारकर गाड़ देंगे।
पीड़ित ने बताया कि आरोपी दबंग और प्रभावशाली किस्म के लोग हैं, जिसके कारण उसे और उसके परिवार को लगातार भय का माहौल झेलना पड़ रहा है। इस संबंध में उसने उपजिलाधिकारी हसनगंज को प्रार्थना पत्र देकर निर्माण कार्य रुकवाने और आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। पीड़ित के अनुसार इस मामले में अगली सुनवाई 8 फरवरी 2026 को न्यायालय में निर्धारित है।
वहीं प्रशासनिक स्तर पर मामले की जांच की बात कही जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो जमीन विवाद से बड़ा संघर्ष भी हो सकता है।

