झांसी/दिल्ली। मेहनत की कमाई के लिए दर-दर भटकने को मजबूर एक पेटी कॉन्ट्रैक्टर की कहानी सामने आई है, जिसने सिस्टम पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मऊरानीपुर क्षेत्र के खरखोरा निवासी राममिलन ने आरोप लगाया है कि सिविल से जुड़े एक ठेकेदार ने उनका 2 लाख 40 हजार रुपये का भुगतान पिछले तीन साल से रोक रखा है।
पीड़ित राममिलन के अनुसार, वे दिल्ली मोती सात नंबर में सिविल ठेकेदारी का काम करते हैं और वर्ष 2020 में उन्होंने सिविल से संबंधित एक प्रोजेक्ट में पेटी कॉन्ट्रैक्टर के रूप में कार्य किया था। यह काम उन्होंने ठेकेदार जितेंद्र बमबानी कॉन्टैक्टर के अधीन किया था। काम पूरा 2022 होने के बाद उनका 2.40 लाख रुपये का बिल बकाया रह गया, जिसे आज तक नहीं चुकाया गया है। 2022 में राममिलन और कॉन्टैक्टर के बीच हिसाब हुआ और कांटेक्ट करने बोला था कि 2 महीने बाद तुम्हें पैसा मिल जाएगा लेकिन आज तक पैसा नहीं मिला
राममिलन ने बताया कि काम के दौरान उन्होंने अपनी लेबर को समय पर भुगतान करने के लिए कर्ज तक लिया, ताकि मजदूरों की मजदूरी न रुके। लेकिन जब खुद के मेहनताने की बारी आई, तो ठेकेदार ने पैसे देने से साफ इनकार कर दिया।
पीड़ित का कहना है कि उन्होंने इस मामले में स्थानीय थाने में शिकायत भी दर्ज कराई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लगातार तीन वर्षों से वे अपने ही पैसे के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं।
इस पूरे मामले ने न केवल ठेकेदारी सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी दिखाया है कि छोटे कॉन्ट्रैक्टर और मजदूर किस तरह बड़े ठेकेदारों के सामने बेबस हो जाते हैं।
राममिलन ने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाते हुए कहा है कि उनकी मेहनत की कमाई उन्हें दिलाई जाए और दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है या फिर एक और मेहनतकश यूं ही अपने हक के लिए भटकता रहेगा।

