आवास योजना से बना घर, लेकिन नहीं मिली बुनियादी सुविधाएं: रास्ता बंद कर बिजली-पानी भी रोका, पीड़िता ने लगाई न्याय की गुहार

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मुंगेर (बिहार)। जिले के जमालपुर थाना क्षेत्र के छोटी केशोपुर वार्ड संख्या 32 से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक अनुसूचित जनजाति परिवार ने आरोप लगाया है कि दबंग पड़ोसियों द्वारा उनके घर तक आने-जाने का रास्ता बंद कर दिया गया है। इतना ही नहीं, बिजली, पानी और नाली जैसी बुनियादी सुविधाओं से भी परिवार को वंचित कर दिया गया है। पीड़ित परिवार का कहना है कि उनका घर सरकार की आवास योजना के तहत बना है, लेकिन रास्ता बंद होने के कारण वे किसी भी सरकारी सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हैं।

पीड़िता संगीता देवी के अनुसार उनके परिवार की जमीन वर्षों पहले उनके दादा-दादी द्वारा खरीदी गई थी, जिसका विवरण सर्वे शीट संख्या 113, प्लॉट नंबर 12770, तौजी 416, थाना 22, मौजा केशोपुर में दर्ज है। इसी जमीन पर उनका घर बना हुआ है। वर्ष 2016 में नगर परिषद के माध्यम से आवास योजना के तहत उनके परिवार को घर निर्माण की स्वीकृति भी मिली थी और उसी आधार पर उन्होंने अपना घर बनवाया। लेकिन घर बनने के बावजूद आज तक बिजली, पानी, सड़क और नाली जैसी सुविधाएं उनके दरवाजे तक नहीं पहुंच सकीं।

पीड़िता का आरोप है कि वर्ष 2015 से ही कुछ दबंग पड़ोसियों ने उनके घर तक आने वाले दोनों रास्तों पर अतिक्रमण कर दिया। उनके घर के पश्चिम की ओर नगर पालिका की गली थी, जबकि पूर्व और दक्षिण दिशा में वर्षों से एक पैदल रास्ता था जो मुख्य सड़क तक जाता था। आरोप है कि पड़ोसियों ने पहले सहमति से तीन-तीन फीट रास्ता छोड़ने की बात कही थी, लेकिन बाद में दोनों रास्तों को पूरी तरह बंद कर दिया गया। इसके कारण परिवार का घर चारों तरफ से घिर गया है और किसी भी प्रकार की सरकारी सुविधा वहां तक नहीं पहुंच पा रही है।

महिला ने आरोप लगाया कि पड़ोसी विरेन्द्र तांती, जो कि पुलिस विभाग से सेवानिवृत्त दरोगा हैं, और ललन तांती ने मिलकर रास्ते को पूरी तरह से अतिक्रमित कर दिया है। पीड़िता का कहना है कि इन लोगों की स्थानीय स्तर पर पकड़ और प्रभाव होने के कारण उनके द्वारा दिए गए कई आवेदन के बावजूद अब तक प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

पीड़िता के अनुसार हाल ही में ललन तांती द्वारा अंचल कार्यालय में जमीन की नापी के लिए आवेदन दिया गया है, जिसके आधार पर उन्हें 21 अप्रैल 2026 को नोटिस भी मिला है। महिला का आरोप है कि नापी के नाम पर अतिक्रमित रास्ते को स्थायी रूप से बंद करने की कोशिश की जा रही है, जिससे उनका परिवार पूरी तरह से घर में कैद हो जाएगा।

इस पूरे विवाद के बीच पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया है कि अतीत में वार्ड पार्षद और उनके सहयोगियों द्वारा उनके परिवार के साथ मारपीट और अभद्र व्यवहार की घटनाएं भी हो चुकी हैं। उनका कहना है कि पहले भी उनके घर में घुसकर मारपीट की गई थी और इसकी शिकायत जमालपुर थाने में दर्ज कराई गई थी, लेकिन प्रभावशाली लोगों के कारण मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो सकी।

संगीता देवी का कहना है कि उनका घर सरकारी आवास योजना के तहत बना होने के बावजूद आज तक वहां बिजली का मीटर नहीं लग पाया, पानी की पाइपलाइन नहीं पहुंची और न ही नाली या सड़क की सुविधा मिल सकी। उनका परिवार रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी भारी कठिनाइयों का सामना कर रहा है।

पीड़िता ने जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि पहले उनके घर तक आने-जाने का रास्ता खुलवाया जाए, ताकि बिजली, पानी और अन्य सरकारी सुविधाएं उनके घर तक पहुंच सकें। साथ ही उन्होंने अतिक्रमण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की भी अपील की है।

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