कर्नाटक में CM बदलने की अटकलें फिर से तेज, उर्जा मंत्री के घर पर हुई थी बैठक

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इसी सोमवार को कर्नाटक के उर्जा मंत्री K.J. जॉर्ज के घर पर एक लंच मीटिंग हुई और उसी मीटिंग के बाद से राज्य में एक बार फिर से सीएम बदलने की अटकलें तेज हो गई हैं। आइए आपको विस्तार से सब कुछ बताते हैं।कर्नाटक में मौजूदा मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच सत्ता को लेकर टकराव की खबरें कई बार आ चुकी हैं और अब एक बार फिर से राज्य में CM बदलने की अटकलें तेज हो गई हैं। ये अटकलें एक लंच मीटिंग के बाद से तेज हुई हैं जो इसी सोमवार को यानी 18 मई को एक राज्य के उर्जा मंत्री K.J. जॉर्ज के घर पर हुई थी। दरअसल उस लंच मीटिंग में AICC अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, कर्नाटक सीएम सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार शामिल थे जिसके बाद से राज्य में सत्ता परिवर्तन की अटकलें तेज हो गई हैं।क्या सच में होगा सत्ता परिवर्तन?
राज्य में CM बदलने की अटकलें तेज हैं मगर ऐसा बताया जा रहा है कि अभी राहुल गांधी अगले एक सप्ताह के लिए किसी भी मीटिंग के लिए उपलब्ध नहीं है। अब ऐसे में राज्य में कोई परिवर्तन होने की संभावना नहीं है। इसका मतलब कि इस दिशा में अब एक सप्ताह बाद ही कोई भी डेवलमेंट हो पाएगा। आपको बता दें कि जिस दिन यह मीटिंग हुई उसके अगले दिन यानी मंगलवार को ही राज्य में सिद्धारमैया के नेतृत्व में सरकार ने तीन साल पूरे किए हैं।

डीके शिवकुमार का CM बनना आसान नहीं
आपको बता दें कि कर्नाटक में सिद्धरामैया को CM पद से हटाकर D.K. शिवकुमार का CM बन जाना इतना आसानी नहीं है। पूर्व मंत्री और सिद्धारमैया के हितैषी के. राजन्ना ने एक बयान में कहा कि पार्टी के सीनियर लीडर्स चाहते हैं कि अगर सिद्धारमैया को बदलने की नौबत आती है तो उनकी जगह मौजूदा गृह मंत्री जी. परमेश्वर को CM बनाया जाए।

यह भी बता दें कि सिद्धारमैया खेमे के कहे जाने वाले मंत्री H.C. महादेवप्पा, जमीर अहमद खान जैसे मंत्रियों ने जी. परमेश्वर के साथ नाश्ता करके इन अटकलों को और मजबूती दे दी है। उस मीटिंग में सीनियर लीडर और मंत्री सतीश जारकीहोली भी मौजूद थे जो KPCC अध्यक्ष पद देने की मांग करते हुए आलाकमान पर लगातार दबाव बना रहे हैं। बता दें कि ये सभी नेता D.K. शिवकुमार को CM बनाने के पक्ष में नहीं हैं।

सिद्धारमैया दल ने विधायकों को उकसाया?
राज्य में CM बदलने की अटकलों के बीच एक खबर यह भी आ रही है कि इन विधायकों को उकसाने के पीछे भी सिद्धारमैया दल का ही हाथ है ताकि आलाकमान उन्हें बदलने का फैसला आसानी से न ले सके और राज्य में अगर मंत्री मंडल में बदलाव होता है तो फिर इस बात की प्रबल संभावना बन जाती है कि सिद्धारमैया अपना बचा हुआ 2 साल का कार्यकाल भी पूरा कर लेंगे।

अब अगर कर्नाटक में उन्हें बदलने का फैसला होता है तो फिर अगला CM कौन होगा, इस पर फैसला ले पाना पार्टी के हाईकमांड के लिए आसान नहीं होगा। कुल मिलाकर अगले सप्ताह से सरकार में फिर से कुछ उठापटक देखने को मिल सकती है।

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