राजस्थान के बांसवाड़ा जिले की रहने वाली सुगना जी ने मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार के साथ साड़ी सिलाई और कढ़ाई का छोटा काम शुरू किया था। परिवार को उम्मीद थी कि मेहनत के दम पर धीरे-धीरे कारोबार बढ़ेगा और घर की आर्थिक स्थिति सुधरेगी, लेकिन सूरत की एक साड़ी कंपनी पर गंभीर आरोप लगने के बाद अब यह परिवार परेशानियों में घिर गया है।
जानकारी के अनुसार सुगना जी ने गुजरात के सूरत स्थित कंपनी “अंबिका टेक्सटाइल हाउस” से बड़ी मात्रा में साड़ियों का ऑर्डर दिया था। बिल और दस्तावेजों के अनुसार 28 मार्च 2026 को ऑर्डर बुक किया गया था और 7 अप्रैल 2026 को करीब 41 हजार 485 रुपये का टैक्स इनवॉइस जारी किया गया। इसमें अलग-अलग डिजाइन की साड़ियों और ड्रेस मटेरियल का जिक्र किया गया है।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि कंपनी की ओर से पूरा माल समय पर नहीं पहुंचाया गया। कई बार संपर्क करने के बावजूद उन्हें लगातार टालमटोल किया जाता रहा। सुगना जी का कहना है कि उन्होंने कंपनी पर भरोसा कर भुगतान किया था, लेकिन बदले में उन्हें अधूरा माल मिला और जो सामान आया उसमें भी कई दिक्कतें थीं।
परिवार के अनुसार जब उन्होंने कंपनी से अपने पैसे वापस मांगे तो पहले आधा पैसा लौटाने की बात कही गई। बाद में कुछ रकम दी गई लेकिन बाकी भुगतान रोक लिया गया। आरोप है कि अब कंपनी के लोग साफ कह रहे हैं कि “जो करना है कर लो, बाकी पैसे नहीं मिलेंगे।”
इस पूरे मामले ने गरीब मजदूर परिवार की कमर तोड़ दी है। सुगना जी और उनके पति दोनों मिलकर दिन-रात मेहनत करते थे। सिलाई और कढ़ाई के काम से जो कमाई होती थी उसी से परिवार चलता था। लेकिन अब पैसे फंस जाने के कारण उनका काम भी प्रभावित हो गया है। परिवार का कहना है कि उधार लेकर कारोबार शुरू किया था और अब कर्ज चुकाना भी मुश्किल हो रहा है।
पीड़ित पक्ष ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और कंपनी के खिलाफ उचित कार्रवाई हो ताकि मेहनत मजदूरी करने वाले लोगों के साथ दोबारा इस तरह की धोखाधड़ी न हो सके।
स्थानीय लोगों का कहना है कि छोटे व्यापारियों और मजदूर परिवारों के साथ इस तरह की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन कई बार आर्थिक कमजोरी और कानूनी जानकारी के अभाव में पीड़ित लोग न्याय नहीं पा पाते।
अब यह मामला इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है और परिवार प्रशासन से न्याय की गुहार लगा रहा है।

