मथुरा में बेटे को जबरन ले जाने के आरोप के साथ आवास की मांग, विधवा महिला ने मीडिया के माध्यम से लगाई गुहार

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मथुरा। उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद से एक संवेदनशील पारिवारिक विवाद का मामला सामने आया है, जिसमें एक विधवा महिला ने अपने नाबालिग पुत्र को जबरन कार में बैठाकर ले जाने का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता पूजा शर्मा ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक तथा थाना फरह में प्रार्थना पत्र देकर मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पूजा शर्मा निवासी राधेश्याम कॉलोनी, थाना गोविंदनगर, मथुरा ने आरोप लगाया कि उनके पति स्वर्गीय हरीलाल शर्मा की वर्ष 2014 में मृत्यु हो गई थी। उनके दो पुत्र हैं, जिनमें से एक पुत्र हर्षित उनके साथ रह रहा है, जबकि बड़े पुत्र कृष्णा को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ।

शिकायत में कहा गया है कि लगभग दो वर्ष पूर्व जब वह अपने पुत्र कृष्णा के साथ आवश्यक कार्य से बाजार जा रही थीं, तभी कुछ रिश्तेदारों ने कथित रूप से रास्ते में रोककर बच्चे को उनसे अलग किया और कार में बैठाकर ले गए। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद उन्होंने शोर मचाया, जिस पर कुछ लोग कार के पीछे दौड़े, लेकिन संबंधित लोग बच्चे को लेकर चले गए।

पूजा शर्मा ने अपने प्रार्थना पत्र में कहा कि वह घटना के बाद लगातार थाना और उच्चाधिकारियों को शिकायत देती रही हैं, लेकिन उन्हें अपेक्षित सुनवाई नहीं मिली। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें मामले में कार्रवाई करने पर जान से मारने की धमकियां दी गईं।

आवास की मांग को लेकर भी उठाई आवाज

आवास की मांग को लेकर भी पूजा शर्मा ने मीडिया के माध्यम से अपनी पीड़ा व्यक्त की है। उनका कहना है कि वह वर्तमान में अपने बच्चों के साथ किराए के मकान में रह रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके ससुर उन्हें पैतृक घर में रहने के लिए स्थान उपलब्ध नहीं करा रहे हैं, जबकि उसी घर में उनकी ननद नीतू अपने दो बच्चों के साथ लगभग नौ वर्षों से रह रही हैं।

पूजा शर्मा का कहना है कि वह अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि यदि वर्तमान परिस्थिति बनी रहती है और उनके ससुर के बाद भी उन्हें रहने के लिए घर नहीं मिला, तो वह अपने बच्चों को लेकर कहां जाएंगी। उन्होंने मीडिया के माध्यम से संबंधित पक्षों से उन्हें रहने के लिए सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने की अपील की है।

दूसरी ओर, थाना फरह में प्रस्तुत एक अन्य लिखित बयान में यह उल्लेख किया गया कि 1 जुलाई 2026 को महिला अपने पुत्र से मिलने थाने पहुंचीं। कथित रूप से बच्चे ने अपने दादा के साथ रहने की इच्छा जताई और महिला ने लिखित रूप में यह कहा कि उन्हें अपने पुत्र के निर्णय से आपत्ति नहीं है।

इसी क्रम में बच्चे के दादा द्वारा भी लिखित रूप से यह आश्वासन दिया गया कि बालक उनके साथ रह रहा है और उसके पालन-पोषण तथा देखभाल में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।

मामले में फिलहाल दोनों पक्षों के दावों और लिखित बयानों को देखते हुए यह स्पष्ट है कि विवाद नाबालिग बच्चे के संरक्षण और अभिरक्षा के साथ-साथ पारिवारिक आवास व्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है। अंतिम निर्णय संबंधित न्यायिक अथवा प्रशासनिक प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगा।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, प्राप्त प्रार्थना पत्रों और बयानों के आधार पर मामले की जांच की जा रही है तथा आवश्यक कानूनी कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी।

 

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