बहादुरगढ़ में 13 वर्षीय मासूम रहस्यमयी ढंग से लापता, परिजनों का साजिश का आरोप मोहल्ले में दहशत, पुलिस पर लापरवाही के गंभीर सवाल

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बहादुरगढ़। शहर के जठ्याड़ा मोहल्ले में रहने वाले एक दिमागी रूप से कमजोर 13 वर्षीय बच्चे के अचानक लापता हो जाने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। परिजनों ने मोहल्ले के ही दो लोगों पर गंभीर शक जताते हुए आरोप लगाया है कि उनके बेटे को सोची-समझी साजिश के तहत गायब किया गया है। वहीं पुलिस पर भी परिवार ने लापरवाही के आरोप लगाए हैं।

लड़के की मां, नगीश देवी ने बताया कि उनका बेटा 15 जुलाई 2025 की शाम करीब 2 बजकर 54 मिनट पर घर से “मैदान जाने” के बहाने निकला था। सीसीटीवी फुटेज में वह पुराने बस अड्डा, बहादुरगढ़ पर उसी समय पहुंचता हुआ दिखाई दिया। इसके बाद 4 बजकर 4 मिनट तक उसी क्षेत्र में उसकी मौजूदगी कैमरे में कैद हुई। इसके बाद बच्चे का कोई सुराग नहीं मिला।

जब बच्चा शाम तक घर नहीं लौटा तो परिजनों ने पूरे इलाके में ढूंढकर देखा, लेकिन किसी भी तरह की जानकारी नहीं मिली। परेशान माता-पिता ने उसी रात शाम 6 बजे थाना बहादुरगढ़ शहर पहुंचकर गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाने की कोशिश की। लेकिन परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें घंटों थाना परिसर में बैठाए रखा और बाद में यह कहकर लौटा दिया कि “24 घंटे बाद कार्रवाई होगी”।

परिजनों ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज होने के बावजूद अब तक पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, न ही बच्चे का कोई सुराग मिला है। इससे परिवार की चिंता और बढ़ चुकी है।

नगीश देवी ने मोहल्ले के ही रामनाथ और उसकी बहन सुरेती रागनी पर गंभीर शक जाहिर किया है। उनका कहना है कि लगभग 10–15 दिन पहले दोनों ने बच्चे के परिवार को धमकी दी थी, जिसके बाद से ही उन्हें इनपर संदेह है। पुलिस ने पूछताछ के बाद दोनों को छोड़ दिया, लेकिन परिवार का कहना है कि यह सिर्फ दिखावा था।

परिजनों का आरोप है कि यह पूरा मामला किसी गहरी साजिश का हिस्सा है और उन्हें डर है कि बच्चे को नुकसान पहुंचाया गया हो या कहीं छिपाकर रखा गया हो। मां ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि इन संदिग्धों पर कड़ी कार्रवाई करते हुए उनके लापता बेटे का पता लगाया जाए।

बहादुरगढ़ में यह घटना चर्चा का बड़ा विषय बन गई है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब सीसीटीवी में बच्चे की अंतिम लोकेशन स्पष्ट है, तो पुलिस अब तक कोई सुराग क्यों नहीं जुटा पाई? वहीं परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है और वे हर पल अपने मासूम बेटे के सही-सलामत मिलने की उम्मीद लगाए हुए हैं।

पड़ोसियों और रिश्तेदारों की भीड़ लगातार पीड़ित परिवार के घर जुट रही है, जबकि मोहल्ले में डर और बेचैनी का माहौल बना हुआ है।

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