मैनपुरी में गरीब परिवार की बैनामा की जमीन पर कब्जे की साजिश, फर्जी बैनामा रद्द कराने की प्रशासन से गुहार; पीड़ित परिवार दर-दर भटकने को मजबूर

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मैनपुरी।

उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले के किशनी तहसील अंतर्गत ग्राम रुद्रपुर मौजा जासमई में एक गरीब परिवार की बैनामा वाली भूमि पर अवैध हस्तक्षेप का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़िता नसीमा बेगम ने आरोप लगाया है कि उनकी पुश्तैनी व बैनामा की जमीन पर दबंग किस्म के व्यक्ति द्वारा जबरन कब्जा करने और निर्माण कार्य रोकने की धमकियां दी जा रही हैं, जिससे पूरा परिवार भय और मानसिक उत्पीड़न में जीने को मजबूर है।

पीड़िता के अनुसार, गाटा संख्या 446 की यह भूमि करीब 15–16 साल पुरानी है, जिसे उनके पिता इबरार अली ने विधिवत बैनामा के माध्यम से खरीदा था। जमीन का एक हिस्सा पर पहले से मकान बना हुआ है, जबकि शेष हिस्से में नींव भरी पड़ी है और निर्माण की तैयारी थी। इसी दौरान विपक्षी अर्पित चौहान पुत्र हरेंद्र सिंह चौहान, पिरबल चौहान, अमित चौहान मौके पर पहुंचा और दावा किया कि उसने भी उसी जमीन का बैनामा करा लिया है और अब वहां कोई निर्माण नहीं होने देगा।

आरोप है कि विपक्षी ने नसीमा बेगम और उनके पति के साथ गाली-गलौज की और खुलेआम धमकी दी कि यदि निर्माण कार्य किया गया तो परिणाम गंभीर होंगे। पीड़ित परिवार का कहना है कि आरोपी आए दिन दबाव बनाता है और कहता है कि “तुम मुसलमान हो, मैनपुरी जिले में कहीं नहीं चल पाओगे।” इस तरह की धमकियों से परिवार दहशत में है और अपनी ही जमीन पर जाने से डर रहा है।

पीड़िता ने बताया कि विपक्षी परिवार की जमीन सड़क के पीछे स्थित है और अब वे आगे-पीछे की जमीन हड़पने की नीयत से इस भूमि पर कब्जा करना चाहते हैं। बीते दो महीनों से विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। पीड़ित परिवार ने प्रशासन, तहसील और स्थानीय स्तर पर कई बार आवेदन दिए, लेकिन आरोप है कि अब तक न तो कोई अधिकारी मौके पर पहुंचा और न ही पैमाइश कराई गई।

पीड़ित परिवार का कहना है कि अर्पित चौहान का बैनामा भी देख लिया जाए किस जगह 47 पर इनका खेत है

सबसे गंभीर आरोप यह है कि लेखपाल स्तर पर भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है और पैसे के दम पर पूरे मामले को दबाया जा रहा है। लगातार आवेदन देने के बावजूद सुनवाई न होने से पीड़ित परिवार पूरी तरह टूट चुका है। नसीमा बेगम ने जिला प्रशासन से मांग की है कि उनकी बैनामा वाली भूमि की निष्पक्ष पैमाइश कराई जाए और अवैध हस्तक्षेप करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

अब सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन इस मामले में समय रहते संज्ञान लेगा, या फिर एक गरीब परिवार को अपनी ही खरीदी हुई जमीन के लिए यूं ही दर-दर भटकना पड़ेगा।

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