कन्नौज। विकास की रफ्तार जहां एक ओर गांवों को शहरों से जोड़ रही है, वहीं दूसरी ओर बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी ग्रामीणों के लिए अभिशाप बनती जा रही है। ऐसा ही मामला उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले के सराय दौलत गांव का सामने आया है, जहां संध्या नाम की महिला पिछले करीब एक वर्ष से पानी की गंभीर समस्या से जूझ रही है। हाईवे निर्माण के बाद गांव का भूगोल तो बदला, लेकिन पानी की उपलब्धता एक तरफ सिमटकर रह गई, जिससे दूसरी ओर रहने वाले परिवारों का जीवन संकट में पड़ गया है।
संध्या, जिनकी उम्र लगभग 35 वर्ष है और जो अपने पति मुकेश के साथ सराय दौलत में रहती हैं, बताती हैं कि पहले गांव में लगे सरकारी नल से पानी की समस्या नहीं थी। लेकिन हाईवे बनने के बाद नल खराब हो गए और उनकी मरम्मत तक नहीं कराई गई। स्थिति यह है कि अब उन्हें दूर स्थित एकमात्र सरकारी नल से पानी भरने जाना पड़ता है। कई बार मजबूरी में आसपास के ट्यूबवेल से पानी लेना पड़ता है, वह भी तब जब कोई उपलब्ध हो।
गांव में एक सरकारी टोटी भी लगाई गई थी, जो लंबे समय से बंद पड़ी है। संध्या का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों और विभागों में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। गांव के प्रधान राजवीर से भी उन्होंने कई बार मदद की गुहार लगाई, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि हाईवे बनने के बाद गांव के एक हिस्से में पानी की सुविधा उपलब्ध है, जबकि दूसरी तरफ रहने वाले लोग पूरी तरह उपेक्षित हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि विकास कार्यों में संतुलन और योजना की भारी कमी रही है। संध्या और उनके जैसे कई परिवार रोजमर्रा की जरूरत के लिए पानी जुटाने में ही अपनी ऊर्जा और समय खर्च कर रहे हैं।
यह मामला न केवल स्थानीय प्रशासन की लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करता है कि आखिर कब तक ग्रामीणों को अपनी मूलभूत जरूरतों के लिए इस तरह संघर्ष करना पड़ेगा। यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो यह स्थिति और भी गंभीर रूप ले सकती है।

