जमुई में जमीन मापी को लेकर लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी का बड़ा आदेश, अंचल अधिकारी को दी गई कार्रवाई की हिदायत

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जमुई। बिहार के जमुई जिले में जमीन मापी को लेकर दायर एक शिकायत पर लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम 2015 के तहत दाखिल परिवाद पर सुनवाई करते हुए अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, जमुई ने अंचल अधिकारी झाझा को संबंधित भूमि की मापी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। यह मामला झाझा प्रखंड के सोहजाना गांव से जुड़ा हुआ है, जहां जमीन के नापी को लेकर पीता भरत गोस्वामी पुत्र लक्ष्मण गोस्वामी द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई थी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार सोहजाना गांव निवासी पीता भरत गोस्वामी पुत्र लक्ष्मण गोस्वामी ने 6 जनवरी 2025 को बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम 2015 की धारा 2 के तहत परिवाद दायर किया था। इस परिवाद को अनन्य संख्या 537110106012102156 के रूप में दर्ज किया गया। अपने आवेदन में परिवादी ने बताया कि उनकी जमीन खाता संख्या 14, खेसरा संख्या 684 और 687, कुल रकवा लगभग 16 डिसमिल की नापी अब तक नहीं कराई गई है, जिसके कारण उन्हें लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से उक्त जमीन की विधिवत मापी कराने की मांग की थी।

मामले की सुनवाई के दौरान लोक प्राधिकार सह अंचल अधिकारी झाझा को नोटिस जारी किया गया और कई तिथियों पर सुनवाई की गई। 27 जनवरी, 10 फरवरी, 24 फरवरी और 1 मार्च को इस मामले में सुनवाई हुई, जिसमें परिवादी स्वयं उपस्थित रहे और अपने पक्ष में साक्ष्य प्रस्तुत किए। सुनवाई के दौरान अंचल अधिकारी झाझा की ओर से भी प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया, जिसमें बताया गया कि मौजा सोहजाना के खाता संख्या 14 के खेसरा 684 में बेलगान दर्ज है और इसकी जमाबंदी कायम नहीं है।

प्रतिवेदन में यह भी स्पष्ट किया गया कि खाता संख्या 14 के खेसरा 687, रकवा 13 डिसमिल जमीन जमाबंदी सुधार वाद संख्या 9/07 के आदेश के आलोक में जमाबंदी संख्या 11 में भरत गोस्वामी, भगवान गोस्वामी और बोधु गोस्वामी के नाम से दर्ज है। अंचल कार्यालय की ओर से बताया गया कि संबंधित जमीन की मापी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और चौहद्दीदार को सूचना निर्गत कर दी गई है। इसके बाद 28 अप्रैल को जमीन की मापी की तिथि निर्धारित की गई है।

लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने मामले की सुनवाई और प्रस्तुत प्रतिवेदन का अवलोकन करने के बाद निर्देश दिया कि निर्धारित तिथि पर जमीन की मापी कराई जाए और मापी के बाद उसकी रिपोर्ट कार्यालय को उपलब्ध कराई जाए। आदेश में यह भी कहा गया कि अंचल अधिकारी झाझा मापी की कार्रवाई पूरी होने के बाद विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करेंगे। इसके साथ ही परिवाद को स्वीकार करते हुए वाद की कार्यवाही समाप्त कर दी गई है।

इस आदेश के साथ ही आदेश की प्रति परिवादी और संबंधित प्राधिकार को भेजने का निर्देश दिया गया है। प्रशासनिक स्तर पर यह मामला अब जमीन मापी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आगे बढ़ेगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि जमीन विवाद और मापी से जुड़े मामलों में इस तरह के आदेश से आम लोगों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ जाती है।

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