जयपुर ग्रामीण | जमवारामगढ़
जयपुर ग्रामीण जिले के जमवारामगढ़ तहसील क्षेत्र स्थित ग्राम पंचायत राहौरी में राजस्व तंत्र की मिलीभगत से जमीन हड़पने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि लगभग 50 वर्ष पूर्व मृत व्यक्ति सूरजनारायण (सूरजमल) को कागजों में जीवित बताकर फर्जी तरीके से नामांतरण कराया गया और उसके बाद जमीन की रजिस्ट्री कर दी गई। इस पूरे मामले में तत्कालीन पटवारी हल्का, तहसीलदार, गवाह और कथित खरीदार की संलिप्तता सामने आई है।
गांव में न राशन कार्ड, न वोटर लिस्ट, फिर भी जिंदा दिखा दिया मृतक
परिवादी प्रहलाद शर्मा के अनुसार सूरजनारायण पुत्र दुर्गा की मृत्यु लगभग 40–50 वर्ष पूर्व हो चुकी है। ग्राम राहौरी में उसका कोई परिवारजन निवास नहीं करता, न ही उसका नाम पिछले कई दशकों से मतदाता सूची, राशन कार्ड या अन्य सरकारी अभिलेखों में दर्ज है। इसके बावजूद एक व्यक्ति ने स्वयं को सूरजमल बताकर तहसील में आवेदन प्रस्तुत किया।
पटवारी की फौरी रिपोर्ट बनी फर्जीवाड़े की नींव
आरोप है कि पटवारी हल्का राहौरी ने गांव जाकर जांच किए बिना, किसी भी राहिनदार या संबंधित पक्षकार को नोटिस दिए बिना, कमरे में बैठकर फौरी रिपोर्ट तैयार कर दी। इसी रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन तहसीलदार ने बिना सुनवाई और दस्तावेजों की समुचित जांच किए रहन का नोट हटाने और नामांतरण का आदेश पारित कर दिया।
रिकॉर्ड समय में नामांतरण, उठे सवाल
परिवादी ने बताया कि सामान्यतः नामांतरण प्रक्रिया में वर्षों लग जाते हैं, लेकिन इस मामले में 12 जून 2025 को मात्र कुछ घंटों में नामांतरण दर्ज कर दिया गया। यह तेजी खुद में संदेह पैदा करती है और अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाती है।
स्थानीय सब-रजिस्ट्रार से बचकर दूर करवायी रजिस्ट्री
फर्जी सूरजमल ने जमीन की रजिस्ट्री स्थानीय उप-रजिस्ट्रार जमवारामगढ़ के बजाय आमेर क्षेत्र में करवाई, ताकि गांव के लोगों को भनक न लगे। रजिस्ट्री में ऐसे गवाह बनाए गए जो गांव के निवासी नहीं हैं, जिससे पहचान छुपाने की साजिश साफ झलकती है।
फर्जी आधार और संदिग्ध भुगतान का भी आरोप
मामले में एक फर्जी आधार कार्ड बनाए जाने का भी आरोप है, जिस पर कोई आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। वहीं, बैंक चेक के माध्यम से भुगतान दिखाकर सौदे को वैध साबित करने की कोशिश की गई, जिसकी जांच से पूरे फर्जीवाड़े की परतें खुल सकती हैं।
राजस्व अधिकारियों पर साजिश का आरोप
परिवाद में कहा गया है कि पटवारी और तत्कालीन तहसीलदार ने अपने कर्तव्य की सीमा से बाहर जाकर कार्य किया और जानबूझकर फर्जी व्यक्ति को लाभ पहुंचाया। यदि समय पर निष्पक्ष जांच होती तो न तो नामांतरण होता और न ही जमीन की रजिस्ट्री संभव हो पाती।
FIR दर्ज, जांच शुरू
परिवादी द्वारा पहले दी गई शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने के बाद न्यायालय के निर्देश पर अब पुलिस थाना जमवारामगढ़ में भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धाराओं में FIR दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच मुख्य आरक्षी को सौंपी गई है और पुलिस का कहना है कि सभी दस्तावेजों, बैंक लेन-देन और अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच की जाएगी।
गांव में आक्रोश, निष्पक्ष जांच की मांग
मामला सामने आने के बाद ग्राम राहौरी में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों और राहिनदारों ने मांग की है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और राजस्व रिकॉर्ड में हुए कथित खेल की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
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