कुशीनगर।
जिले के अहिरौली थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम रघुनाथपुर में बीते दो वर्षों से चला आ रहा नाली विवाद अब गंभीर और हिंसक रूप ले चुका है। पीड़ित वीरेंद्र, निवासी रघुनाथपुर, का आरोप है कि गांव के ही जोगिंदर प्रधान ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए जबरन पुरानी नाली को बंद करा दिया और उनकी निजी जमीन से करीब 100 फुट लंबी नई नाली खुदवा दी। इस मनमानी का विरोध करने पर 3 जनवरी को मामला मारपीट तक पहुंच गया, जिसमें वीरेंद्र और उनके परिवार के साथ गंभीर रूप से मारपीट की गई।
पीड़ित परिवार का कहना है कि यह विवाद कोई नया नहीं है। पिछले दो वर्षों से वे लगातार प्रशासनिक दफ्तरों और थाने के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कहीं भी उनकी सुनवाई नहीं हो रही। आरोप है कि प्रधान होने के कारण जोगिंदर का स्थानीय स्तर पर प्रभाव इतना ज्यादा है कि हर जगह से पीड़ित को निराशा ही हाथ लगी है। आवेदन देने के बावजूद न तो नाली विवाद का समाधान हुआ और न ही मारपीट की घटना पर कोई ठोस कार्रवाई की गई।
वीरेंद्र का आरोप है कि पुरानी नाली गांव की निकासी का मुख्य साधन थी, जिसे जानबूझकर बंद कराया गया, जिससे उनके घर और आसपास जलभराव की स्थिति बनी रहती है। इसके बाद दबाव बनाकर उनकी निजी भूमि से नई नाली निकलवाई गई, जो न केवल गैरकानूनी है बल्कि भविष्य में बड़े विवाद और नुकसान का कारण बन सकती है। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो प्रधान और उनके समर्थकों ने खुलेआम धमकी दी और मारपीट की।
पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें लगातार डराया-धमकाया जा रहा है और जान से मारने की धमकी भी दी गई है। परिवार का दावा है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो किसी बड़ी अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता। वीरेंद्र ने बताया कि उन्होंने ब्लॉक, तहसील, थाना और अन्य अधिकारियों को लिखित शिकायत दी, लेकिन हर जगह से सिर्फ आश्वासन मिला, कार्रवाई शून्य रही।
अब हताश होकर पीड़ित परिवार ने मीडिया के माध्यम से अपनी आवाज उठाई है। उनका कहना है कि वे चाहते हैं कि यह मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचे, ताकि निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। परिवार की मांग है कि अवैध रूप से निकाली गई नाली को बंद कराया जाए, पुरानी नाली को बहाल किया जाए और मारपीट व धमकी के मामले में प्रधान सहित सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
ग्रामीणों का भी कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते हस्तक्षेप नहीं करता, तो गांव में तनाव और बढ़ सकता है। फिलहाल रघुनाथपुर में दहशत का माहौल है और पीड़ित परिवार न्याय की आस में दर-दर भटकने को मजबूर है।
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