टैरिफ के बाद ट्रंप की ‘थर्ड कंट्री’ डिपोर्टेशन पॉलिसी भी हुई गैरकानूनी, कोर्ट ने फैसले को दिया रद्द करने का आदेश

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कोर्ट से झटके पे झटका लग रहा है। ट्रंप के टैरिफ को अवैध ठहराये जाने के बाद अब संघीय अदालत ने उनकी डिपोर्टेशन पॉलिसी को भी गैरकानूनी करार दे दिया है।वाशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कोर्ट से एक और बड़ा झटका लगा है। ट्रंप के टैरिफ को अवैध ठहराने के बाद अब अदालत ने उनकी ‘थर्ड कंट्री’ डिपोर्टेशन पॉलिसी को भी गैरकानूनी ठहरा दिया है। कोर्ट ने ट्रंप की डिपोर्टेशन पॉलिसी को अवैध ठहराते हुए इसे रद्द करने का आदेश जारी किया है। एक फेडरल जज ने बुधवार को यह फैसला सुनाया।
सुप्रीम कोर्ट कोर्ट करेगा आखिरी फैसला
फेडरल जज द्वारा फैसला देने के बाद ट्रंप प्रशासन में खलबली मच गई है। अब सुप्रीम कोर्ट इसमें आखिरी फैसला करेगा, क्यों यह मामला पहले से ही देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच चुका है। मैसाचुसेट्स के यूएस डिस्ट्रिक्ट जज ब्रायन ई. मर्फी ने अपना फैसला 15 दिनों के लिए स्थगित करने पर सहमति जताई, ताकि सरकार को अपील करने का समय मिल सके। मर्फी ने नोट किया कि पिछले साल यूएस सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन के पक्ष में फैसला दिया था, जिससे मर्फी के पिछले फैसले पर रोक लग गई और कई प्रवासियों को युद्धग्रस्त दक्षिण सूडान भेजने वाली उड़ान पूरी होने की अनुमति मिल गई, जहां उनका कोई संबंध नहीं था।

जज मर्फी ने की ये टिप्पणी
फैसला सुनाने वाले जज मर्फी ने कहा कि होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (डीएचएस) की नीति को चुनौती देने वाले प्रवासियों को उन्हें थर्ड कंट्री में भेजे जाने से पहले “अर्थपूर्ण नोटिस” और आपत्ति जताने का अवसर मिलना चाहिए। नीति “वैध चुनौतियों को समाप्त कर देती है, क्योंकि निर्वासन चुनौतियां उठाने से पहले ही लागू कर दिया जाता है। जज ने कहा-ये हमारे कानून हैं, और संयुक्त राज्य अमेरिका में जन्म लेने की अविश्वसनीय किस्मत के लिए गहन कृतज्ञता के साथ यह अदालत इन कानूनों और हमारे राष्ट्र के मूल सिद्धांत की पुष्टि करती है: कि इस देश में किसी भी ‘व्यक्ति’ को ‘कानून की उचित प्रक्रिया’ के बिना जीवन, स्वतंत्रता या संपत्ति से वंचित नहीं किया जा सकता।

ट्रंप की नीतियों से निर्वासन की गति हो गई है तेज
मर्फी ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन बार-बार उनके आदेशों का उल्लंघन कर चुका है या करने की कोशिश की है। उन्होंने नोट किया कि पिछले मार्च में रक्षा विभाग ने कम से कम छह क्लास सदस्यों को बिना अस्थायी रोक आदेश के तहत आवश्यक प्रक्रिया प्रदान किए अल सल्वाडोर और मैक्सिको भेज दिया । सच्चाई यह है कि किसी भी व्यक्तिगत क्लास सदस्य के दावे की योग्यता कोई नहीं जानता क्योंकि (प्रशासन के अधिकारी) मूल तथ्य छिपा रहे हैं।

डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति जो बाइडेन द्वारा नामित मर्फी ने कहा कि डीएचएस की थर्ड कंट्री निर्वासन नीति उन प्रवासियों को निशाना बनाती है, जिन्हें उनके मूल देश में वापस भेजने से सुरक्षा दी गई थी, जहां उन्हें यातना या अन्य उत्पीड़न का डर था। इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट अधिकारियों ने कहा कि मई में दक्षिण सूडान भेजे गए आठ पुरुषों को अमेरिका में अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया था और उनके पास अंतिम निर्वासन आदेश थे।

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