भदोही: पुरुष का आरोप — पत्नी और प्रेम संबंधों को लेकर परिवार पर दबाव, थाने पर कार्रवाई न करने का आरोप

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भदोही, रिपोर्ट: प्रार्थी मिलन (पुत्र घनश्याम मिश्रा) निवासी ख्योखर, तुफानी नगर बाजार (थाना सुरियावां, तहसील ज्ञानपुर) ने जनपद भदोही के पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत में बताया है कि उनके परिवार के साथ लगातार जानबूझकर फसाने और बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रार्थी ने अपनी शिकायत में कई गंभीर आरोप लगाए हैं जिनमें पुलिस द्वारा सुनवाई न करना और स्थानीय लोगों व पत्नी की धमकियाँ शामिल हैं।

शिकायत का संक्षेप

मिलन का कहना है कि वह लगभग 6 वर्षों से बाहर थे। हाल ही में घर लौटने पर पता चला कि उनकी पत्नी पूजा का 3 वर्ष का एक पुत्र है। प्रार्थी ने पूछा कि जब वह छह साल से घर पर नहीं थे तो यह बच्चा कैसे हुआ।

पूजा ने, शिकायतकर्ता के अनुसार, अपना बयान देते हुए कहा कि यह बच्चा बड़े बाबू का है और उसका बड़े बाबू के साथ अवैध सम्बन्ध है। प्रार्थी ने दावा किया है कि इस बात का वीडियो भी मौजूद है।

प्रार्थी का आरोप है कि थाना सुरियावां के कुछ कर्मचारी उनकी शिकायत नहीं सुन रहे और दबाव डालकर परिवार को बेइज्जत कर रहे हैं; यहां तक कि पूजा को जबरदस्ती प्रार्थी के घर छोड़ा गया।

मिलन ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में कई बार प्रार्थना-पत्र थाने में दिए, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि पूजा बार-बार परिवार को फसाने की धमकी दे रही है और प्रार्थी की माँ को नींद की गोली देने की भी बात की गई है — प्रार्थी का आरोप है कि यह जान लेने या गंभीर नुकसान पहुँचाने के इरादे से किया गया प्रयास था।

पूजा के कथित निर्देशों तथा बड़े बाबू के समर्थन के चलते परिवार पर सामाजिक और मानसिक दबाव बढ़ गया है, इसीलिए प्रार्थी ने पुलिस आयुक्त से तत्काल शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है।

प्रार्थी के शब्दों में “मैं छह साल बाहर रहने के बाद जब घर आया तो मेरे सामने ऐसी स्थिति थी कि मेरी पत्नी कहती है कि बच्चा बड़े बाबू का है। थाना वाले सुनने को तैयार नहीं हैं और हम पर दबाव डाला जा रहा है। पूजा लगातार धमकी देती है कि वह हमें फसा देगी — यहां तक कि मेरी माँ को नींद की गोली भी दी गई। मैंने कई बार आवेदन दिया पर कुछ नहीं हुआ।” — मिलन (शिकायतकर्ता)

कानूनी व सार्वजनिक पहलू शिकायतकर्ता के दावों में गंभीर आरोप — निजी संबंध, सामाजिक बदनामगी, धमकियाँ, और जान-माल के संभावित खतरों — शामिल हैं। ऐसे मामलों में आम तौर पर तीन पहलू महत्वपूर्ण होते हैं: (1) पीड़ित/शिकायतकर्ता के बयान और सबूत (जैसे वीडियो, मेडिकल रिपोर्ट, गवाह), (2) थाने में दर्ज शिकायत/एफआईआर व पुलिस कार्रवाई का रिकॉर्ड, और (3) संबंधित पक्ष (पूजा/बड़े बाबू) के जवाब। वर्तमान शिकायत के अनुसार प्रार्थी ने वीडियो और बार-बार दिए गए आवेदन होने का दावा किया है; पर इन दावों का औपचारिक प्रमाण-पत्रिकरण (वीडियो की सत्यता, मेडिकल रिपोर्ट, गवाह बयान) सार्वजनिक नहीं किया गया है।

आगे की क्या कार्रवाई की जा सकती है (सुझाव)

1. प्रार्थी को निर्देशित किया जाता है कि यदि उन्होंने अभी तक नहीं किया है तो ताजा लिखित आवेदन/प्रार्थना-पत्र के साथ थाने में एफआईआर दर्ज कराएँ और उसकी एक सत्यापित प्रति प्राप्त करें।

2. अगर थाने में सुनवाई नहीं हो रही है तो इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार जिला मजिस्ट्रेट/डीएम कार्यालय या पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत दर्ज कर उच्च स्तरीय जांच की मांग की जा सकती है।

3. यदि माँ को चोट/दवा देकर नुकसान पहुँचाने का प्रयास हुआ है तो इसकी मेडिकल/पोस्टमार्टम (यदि आवश्यक) रिपोर्ट जरूर करवाई जाए तथा चिकित्सकीय रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।

4. परिवार की सुरक्षा हेतु पुलिस से सुरक्षा की मांग, तथा आवश्यक हो तो घरेलू हिंसा/धमकी से संबंधित धाराओं के तहत अभियोग करने पर विचार करें।

5. साक्ष्य-सुरक्षा: वीडियो/मैसेज/ऑडियो आदि के मूल प्रमाण सुरक्षित रखें और एक कॉपी किसी विश्वसनीय वकील या नज़दीकी कार्यालय में जमा करा दें।

पुलिस से प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट के समय थाना सुरियावां तथा भदोही पुलिस अधीक्षक कार्यालय से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं कराई गई है। मामले का निष्पक्ष और त्वरित सत्यापन और आवश्यक कानूनी कार्रवाई संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है ताकि किसी भी पक्ष का अनुचित शोषण या अन्याय न हो।

निष्कर्ष प्रार्थी मिलन द्वारा लगाए गए आरोप गंभीर हैं और इनमें सामाजिक बदनामी, संभावित शारीरिक हानि व धमकियों के दावे शामिल हैं। मामले में अंतिम निष्कर्ष तभी निकाला जा सकता है जब तमाम साक्ष्य-पत्र, मेडिकल रिपोर्ट और संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर पुलिस या न्यायिक जांच हो। प्रार्थी ने पुलिस अधीक्षक भदोही से त्वरित हस्तक्षेप और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

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