बिहार के समस्तीपुर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने मानवता और पारिवारिक जिम्मेदारियों पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक महिला ने आरोप लगाया है कि उसके पति ने शादी के बाद उसे और उसके तीन बच्चों को बेसहारा छोड़ दिया। महिला का कहना है कि पिछले 26 वर्षों से वह दर-दर की ठोकरें खाकर अपने बच्चों का पालन-पोषण करती रही, लेकिन पति और उसके परिवार ने कभी आर्थिक मदद नहीं की।
पीड़िता मदीना खातून ने बताया कि उसका विवाह जहांगीर आलम से हुआ था। कुछ वर्षों बाद पति ने उसे छोड़ दिया और उसकी जिम्मेदारियों से पूरी तरह किनारा कर लिया। महिला का आरोप है कि तीन बच्चों की परवरिश से लेकर रोजमर्रा के खर्च तक उसने अकेले उठाए, जबकि पति ने कभी हालचाल तक नहीं पूछा।
पंचायत में हुआ था समझौता
मामले को लेकर वर्ष 2005 में दोनों पक्षों के बीच पंचायत बुलाई गई थी। पंचायत में मौजूद लोगों के सामने ज़हांगीर आलम ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए पत्नी के खर्च के लिए हर महीने एक हजार रुपये देने का वादा किया था। उसने यह भी कहा था कि यदि किसी महीने आर्थिक परेशानी होगी तो इसकी सूचना देकर अगले महीने कमी की भरपाई कर देगा।
पंचायत के इस फैसले पर कई ग्रामीणों के हस्ताक्षर भी किए गए थे, लेकिन महिला का आरोप है कि समझौते के बावजूद पति ने अपने वादे को कभी पूरा नहीं किया और न ही एक भी रुपया खर्च के तौर पर दिया।
कोर्ट तक पहुंचा मामला
मदीना खातून ने न्याय की उम्मीद में अदालत का दरवाजा भी खटखटाया। न्यायालय में मामला दर्ज होने के बाद भी उसे अपेक्षित राहत नहीं मिल सकी। महिला का कहना है कि वर्षों से वह न्याय के लिए संघर्ष कर रही है, लेकिन अभी तक उसे अपने अधिकार नहीं मिल पाए हैं।
महिला की प्रशासन से गुहार
मदीना खातून ने प्रशासन से अपील करते हुए कहा है कि जिसने उसे 26 वर्षों तक मानसिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से परेशान किया, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। महिला का कहना है कि जहांगीर आलम जहां भी छिपा हुआ है, उसे खोजकर गिरफ्तार किया जाए और कानून के अनुसार कड़ी सजा दी जाए।
पीड़िता ने कहा कि एक महिला के लिए तीन बच्चों का पालन-पोषण अकेले करना आसान नहीं था, लेकिन उसने हार नहीं मानी। अब उसे उम्मीद है कि प्रशासन और न्याय व्यवस्था उसके साथ न्याय करेगी।

