असम के बक्सा जिले के रजनीश बोरो के साथ लाखों की साइबर ठगी — कई शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं, पीड़ित न्याय के लिए भटक रहा

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असम के जिला बक्सा निवासी रजनीश बोरो, उम्र 40 वर्ष, पिता धनेश्वर बोरो, एक संगठित साइबर गिरोह की ठगी का शिकार बने हैं। मार्च 2025 से शुरू हुई यह ठगी कई महीनों तक चलती रही, जिसमें रजनीश से अलग–अलग बहानों पर लाखों रुपये ऐंठ लिए गए। गंभीर बात यह है कि रजनीश द्वारा थाने, साइबर सेल और राष्ट्रीय पोर्टल पर कई शिकायतें करने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

घटना की शुरुआत 5 नवंबर 2025 को हुई, जब सुबह 10:40 बजे रजनीश को एक अनजान नंबर 84 275-39497 से फोन आया। कॉल करने वाले ने सरकारी अधिकारी बनकर यह दावा किया कि उनके किसी दस्तावेज़, टैक्स या “Coin verification” से जुड़ा गंभीर मामला लंबित है और तुरंत भुगतान न करने पर बड़ी कार्रवाई हो सकती है।

अपराधियों ने रजनीश को मानसिक रूप से भ्रमित किया और कहा कि
“अगर अभी रकम नहीं दी, तो आपका फाइल इनकम टैक्स विभाग में फंस जाएगा।”

डर और भ्रम की स्थिति में रजनीश ने कई किश्तों में रकम भेजनी शुरू कर दी।

सबसे पहले उनसे 1000 रुपये की मांग की गई। इसके बाद लगातार रकम बढ़ती गई—
• 7199 रुपये
• 11000
• 32000 रुपये (20000 + 12000)
• 10000 रुपये
• 22000 रुपये

हर बार कॉलर नए बहाने लेकर सामने आता। कभी फाइल फंसने, कभी राशि अटकने, कभी इनकम टैक्स विभाग का डर, तो कभी “सत्यापन शुल्क” का हवाला दिया गया।
15, 16, 17, 18, 19, 22, 23, 24, 25 और 27 तारीखों को लगातार कॉल आते रहे और हर बार नई कहानी बताकर पैसे की मांग की जाती रही।

आख़िरकार, रजनीश ने जब संदेह किया और मामला अधिकारियों को बताया, तब उन्हें पता चला कि वे एक बड़े साइबर गिरोह के शिकार बन चुके हैं।

लेकिन समस्या यहीं खत्म नहीं हुई।

रजनीश कहते हैं कि उन्होंने
• स्थानीय पुलिस थाने,
• जिला साइबर सेल,
• राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन (1930),
• ऑनलाइन साइबर पोर्टल,
• बैंक शाखाओं
पर कई शिकायतें दर्ज कराईं।

उन्होंने सभी सबूत — कॉल रिकॉर्डिंग, बैंक स्टेटमेंट, स्क्रीनशॉट, तारीखें, नंबर — अधिकारियों को सौंपे, परंतु कहीं से भी ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

थककर रजनीश ने मीडिया से कहा—
“मैंने हर जगह शिकायत की, लेकिन जवाब सिर्फ इतना मिलता है कि ‘जांच जारी है।’ मेरे पैसे गए, मानसिक तनाव गया, और अब न्याय भी समय पर नहीं मिल रहा।”

विशेषज्ञों के अनुसार बढ़ते साइबर अपराधों में तेज कार्रवाई न होने से अपराधियों का उत्साह बढ़ रहा है और पीड़ितों का भरोसा कम होता जा रहा है।

रजनीश की यह पीड़ा उन हजारों नागरिकों की स्थिति को दर्शाती है, जो शिकायतें करने के बाद भी न्याय व्यवस्था की धीमी गति के कारण संघर्ष झेल रहे हैं। रजनीश अब उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन उनकी शिकायत को प्राथमिकता देगा और आरोपियों को पकड़ा जाएगा।

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