बस्ती से सनसनीखेज मामला | विधवा की 7 बीघा जमीन पर देवर-जेठ ही नहीं, सगे बेटों पर भी कब्जे का आरोप—जान से मारने की धमकी, महिला छुपकर रहने को मजबूर

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बस्ती (उत्तर प्रदेश) | विशेष रिपोर्ट

बस्ती जिले के थाना वॉल्टर गंज क्षेत्र अंतर्गत गांव गउखोर से रिश्तों को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक विधवा महिला ने अपने देवर-जेठों के साथ-साथ सगे बेटों पर भी जमीन के लिए साजिश रचने, जान से मारने की धमकी देने और मानसिक उत्पीड़न करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता उर्मिला पांडे, पत्नी स्वर्गीय देवेंद्र पांडे, का कहना है कि वह पिछले 10 वर्षों से न्याय के लिए दर-दर भटक रही हैं और हालात ऐसे हो गए हैं कि उन्हें गांव में छुप-छुप कर रहने को मजबूर होना पड़ रहा है।

उर्मिला पांडे के अनुसार, उनके पति देवेंद्र पांडे आईटीआई में कर्मचारी थे। वर्ष 2016 में सास के निधन के बाद से ही परिवार में जमीन को लेकर विवाद शुरू हो गया। उर्मिला पांडे के दो बेटे हैं—एक बेटा एस.के. पांडे, जो सेना में कर्नल के पद पर कार्यरत बताया जा रहा है, जबकि दूसरा बेटा किशन पांडे एक निजी कंपनी में नौकरी करता है। पीड़िता का आरोप है कि अब उनके सगे बेटे भी ससुराल पक्ष के लोगों के साथ मिल गए हैं और जमीन के लालच में उन्हीं के खिलाफ खड़े हो गए हैं।

पीड़िता का कहना है कि उनके पिता के कोई पुत्र नहीं थे, इसलिए उन्होंने अपनी बेटी को दहेज के रूप में 7 बीघा जमीन दी थी। यह जमीन पूरी तरह उनके नाम है और कानूनी रूप से उसी की मालिकाना हकदार हैं। आरोप है कि इसी जमीन पर कब्जा करने के लिए उनके देवर गोविंद नाथ पांडे, जो ग्राम प्रधान हैं, उनके जेठ त्रीयोगी नाथ पांडे , वीरेंद्र नाथ पांडे और अन्य परिजन लगातार दबाव बना रहे हैं। अब इस साजिश में उनके बेटे और बेटों के ससुराल वाले भी शामिल हो गए हैं।

उर्मिला पांडे ने आरोप लगाया कि जमीन हड़पने के लिए उन्हें आए दिन गाली-गलौज की जाती है, अपमानित किया जाता है और कहा जाता है कि “मर जा, जल्दी मर जाएगी तो जमीन हमारे हाथ आ जाएगी।” पीड़िता का दावा है कि उन्हें जान से मारने की धमकी तक दी गई है और उनके बच्चों को भी नुकसान पहुंचाने की बात कही गई है, ताकि रास्ते से हटाकर जमीन पर कब्जा किया जा सके।

पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि पति के देहांत के बाद जो आर्थिक सहायता और धनराशि उन्हें मिली थी, वह भी परिवार के लोगों ने हड़प ली और आज तक उन्हें नहीं दी गई। बीमारी और असहाय अवस्था में भी न तो बेटों ने साथ दिया और न ही इलाज या दवा की व्यवस्था की।

उर्मिला पांडे का कहना है कि वह पिछले एक दशक से थाने, तहसील और प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर काट रही हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। गांव में प्रभावशाली लोगों के शामिल होने के कारण आरोपी बेखौफ हैं और पीड़िता खुद को पूरी तरह असुरक्षित महसूस कर रही हैं।

पीड़िता ने मीडिया के माध्यम से जिला प्रशासन, पुलिस अधीक्षक और राज्य सरकार से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, उनके देवर-जेठों और सगे बेटों समेत सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, उनकी 7 बीघा जमीन पर उनका अधिकार सुरक्षित किया जाए और उन्हें जान-माल की सुरक्षा प्रदान की जाए। उर्मिला पांडे का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है।

 

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