अमेठी में ग्राम प्रधान पर करोड़ों की अनियमितता का आरोप, बिना काम कराए भुगतान, डस्टबिन से लेकर नाली निर्माण तक में सरकारी धन की लूट

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अमेठी।
जनपद अमेठी के जगदीशपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत मदूपुर उमरवल में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और सरकारी धन के गबन का गंभीर मामला सामने आया है। ग्राम निवासी योगेश सिंह पुत्र दिनेश सिंह ने जिलाधिकारी अमेठी को शपथपत्र युक्त प्रार्थना पत्र देकर ग्राम प्रधान पर बिना कार्य कराए भुगतान कराने, फर्जी कार्य दिखाकर सरकारी धन की निकासी और पंचायत सचिव की मिलीभगत से योजनाओं में लूट-खसोट का आरोप लगाया है।

शिकायतकर्ता के अनुसार ग्राम प्रधान द्वारा विकास कार्यों की सिर्फ कागजी खानापूर्ति कर लाखों रुपये निकाल लिए गए। जब इसकी शिकायत ब्लॉक कार्यालय में की गई तो औपचारिक जांच दिखावे के लिए हुई और मामले को दबा दिया गया। आरोप है कि ग्राम पंचायत सचिव भी इस पूरे खेल में शामिल है और बीडीओ व एडीओ स्तर से भी कार्रवाई से बचाने का प्रयास किया गया।

शिकायत में बताया गया है कि वर्ष 2021 से 2024 के बीच डस्टबिन कार्य के नाम पर कई बार भुगतान कराया गया, जबकि गांव में गिनती के ही डस्टबिन मौजूद हैं। 17 अक्टूबर 2021 और 22 अक्टूबर 2021 को सम्राट कंस्ट्रक्शन को कुल 2 लाख 62 हजार 500 रुपये का भुगतान किया गया, लेकिन मौके पर कार्य नहीं हुआ। इसी तरह 10 दिसंबर 2021 और 11 अप्रैल 2022 को भारत ट्रेडर्स और अन्य फर्मों को लाखों रुपये डस्टबिन कार्य के नाम पर दिए गए, जबकि गांव में डस्टबिन का कोई अता-पता नहीं है।

इसके अलावा स्ट्रीट लाइट, इंसुलेटर, नाली निर्माण और खड़ंजा निर्माण जैसे कार्यों में भी भारी अनियमितता का आरोप है। शिकायत के अनुसार स्ट्रीट लाइट के नाम पर 25 लाइटों का भुगतान दिखाया गया, जबकि गांव में केवल दो-चार लाइटें ही लगी हैं। नाली निर्माण कार्य श्यामलाल के घर से तालाब तक और खड़ंजा निर्माण सन्नू के घर से कप्तान के घर तक दिखाया गया, लेकिन ये कार्य आज तक धरातल पर नहीं हुए।

प्रशासनिक व्यय के नाम पर भी बार-बार हजारों और लाखों रुपये निकाले जाने का आरोप लगाया गया है। अलग-अलग वर्क आईडी के माध्यम से मजदूरी, सामग्री और प्रशासनिक खर्च दिखाकर लगातार भुगतान कराया गया, जिसे शिकायतकर्ता ने घोर वित्तीय अनियमितता बताया है।

योगेश सिंह ने जिलाधिकारी से मांग की है कि ग्राम प्रधान द्वारा किए गए बिंदु संख्या 1 से 12 तक के सभी कार्यों की जांच के लिए जिला स्तरीय समिति गठित की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार का यह खेल यूं ही चलता रहेगा।

यह मामला एक बार फिर पंचायत स्तर पर पारदर्शिता, निगरानी और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन कब तक इस गंभीर शिकायत पर संज्ञान लेता है और सरकारी धन की कथित लूट पर रोक लग पाती है या नहीं।

 

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