हापुड़। जिले के धौलाना ब्लॉक के शाहपुर फगौता गांव के एक किसान ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना के तहत नलकूप के लिए निर्धारित पूरी धनराशि जमा करने के बावजूद महीनों बाद भी उसे बिजली कनेक्शन उपलब्ध नहीं कराया गया है। किसान का कहना है कि बिजली आपूर्ति न मिलने के कारण उसकी फसलें सूखने लगी हैं और उसे भारी आर्थिक नुकसान का खतरा पैदा हो गया है।
शाहपुर फगौता निवासी प्रेमपाल सिंह पुत्र निर्मल सिंह ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना के अंतर्गत अपने खेत में नया नलकूप लगवाया था। नलकूप को संचालित करने के लिए बिजली विभाग द्वारा निर्धारित समस्त शुल्क जमा कर दिया गया। फगौता बिजलीघर के जेई द्वारा उन्हें 25 केवीए का नया कनेक्शन आवंटित किया गया, जिसकी डीपी दान सिंह के नाम से बताई गई।
प्रेमपाल सिंह का आरोप है कि जब विभाग की ओर से लाइन खींचने के लिए श्रमिक पहुंचे तो गांव के ही दान सिंह और विकास नामक व्यक्तियों ने विरोध करते हुए बिजली लाइन बिछाने से रोक दिया। आरोप है कि दोनों ने यह कहते हुए कार्य रुकवा दिया कि यह उनका क्षेत्र है और यहां से लाइन नहीं गुजरने दी जाएगी।

पीड़ित किसान का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में कई बार संबंधित जेई, एसडीओ और प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। परेशान होकर उन्होंने जिलाधिकारी हापुड़, विद्युत विभाग के उच्च अधिकारियों तथा प्रशासन को ईमेल के माध्यम से शिकायत भेजकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
प्रेमपाल जी ने से कई जगह आवेदन भी दिए हैं पर अभी तक नहीं किसी प्रशासन ने सुना और ना ही इस पर खबर लि इसीलिए यहां मीडिया द्वारा मदद चाहते हैं और प्रशासन जल्द से जल्द इसमें कार्रवाई करें
प्रेमपाल सिंह ने बताया कि समय पर सिंचाई नहीं होने के कारण उनकी फसलें बर्बाद होने की स्थिति में पहुंच गई हैं। यदि जल्द बिजली कनेक्शन चालू नहीं कराया गया तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं और नलकूप तक बिजली लाइन पहुंचाकर आपूर्ति शुरू कराई जाए।
ग्रामीण क्षेत्र में किसानों को सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए चलाई जा रही योजनाओं के बावजूद यदि लाभार्थियों को समय पर बिजली कनेक्शन नहीं मिल पा रहा है, तो इससे योजनाओं की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठने लगे हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कब तक कार्रवाई करता है और पीड़ित किसान को राहत मिल पाती है या नहीं।

