दो साल से बेटे के लिए इंसाफ की जंग लड़ रहा पिता, हत्या के आरोपों से हिला नवी मुंबई; पुलिस, डॉक्टरों और अधिकारियों पर साजिश के गंभीर आरोप

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नवी मुंबई महानगरपालिका के वाशी सेक्टर-10 स्थित अस्पताल के चिकित्सा अधिकारी”
महाराष्ट्र के नवी मुंबई में वर्ष 2023 में हुई 21 वर्षीय ऑटो चालक परवेज अय्यूब कुरैशी की संदिग्ध मौत का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। मृतक के पिता अय्यूब कय्यूम कुरैशी ने प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, सीबीआई, महाराष्ट्र सरकार, डीजीपी, पुलिस आयुक्त सहित कई संवैधानिक संस्थाओं को विस्तृत शिकायत भेजकर बेटे की मौत को सुनियोजित हत्या बताते हुए सीबीआई, सीआईडी या एसआईटी से स्वतंत्र, वैज्ञानिक और न्यायालय की निगरानी में जांच कराने की मांग की है। शिकायत में पुलिस अधिकारियों, चिकित्सकों और कई अन्य लोगों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले में जांच एजेंसियों का अंतिम निष्कर्ष आना शेष है।

शिकायत के अनुसार, 21 वर्षीय परवेज अय्यूब कुरैशी 30 अक्टूबर 2023 को रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गए थे। परिवार का आरोप है कि उन्हें नौकरी के इंटरव्यू का बहाना बनाकर घर से बुलाया गया और बाद में उनकी हत्या कर शव को नवी मुंबई के तुर्भे एमआईडीसी स्थित पावणे खदान क्षेत्र के पानी में फेंक दिया गया। मृतक ऑटो रिक्शा चालक था और उसका रिक्शा भी घटनास्थल के पास मिला था।

पीड़ित पिता का दावा है कि उनके पास उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज, ऑडियो रिकॉर्डिंग, सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेज और अन्य डिजिटल साक्ष्य इस पूरे घटनाक्रम को संदिग्ध बनाते हैं। उनका आरोप है कि कई सीसीटीवी फुटेज में एक से अधिक लोगों की गतिविधियां दिखाई देती हैं, लेकिन इन साक्ष्यों के आधार पर हत्या का मामला दर्ज करने के बजाय केवल दुर्घटनावश डूबने से मौत मानते हुए एडीआर दर्ज कर दिया गया।

शिकायत में पोस्टमार्टम प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। पिता का आरोप है कि पोस्टमार्टम के दौरान आवश्यक फॉरेंसिक जांच, विसरा सुरक्षित रखने, डायटम टेस्ट, टॉक्सिकोलॉजी और अन्य वैज्ञानिक परीक्षण नहीं किए गए। उनका कहना है कि बिना आवश्यक जांच के मृत्यु का कारण केवल “पानी में डूबने से मौत” बताना पूरे मामले को संदिग्ध बनाता है। उन्होंने संबंधित डॉक्टरों की भूमिका की भी स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।

अय्यूब कुरैशी ने यह भी आरोप लगाया है कि घटनास्थल से मिले मोबाइल, कपड़े, चप्पल, रिक्शा और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्यों को वैज्ञानिक तरीके से जब्त नहीं किया गया। उनका कहना है कि पंचनामा, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घटनाक्रम के समय में गंभीर विसंगतियां हैं, जिससे पूरे मामले में साक्ष्य मिटाने और वास्तविक घटना छिपाने की आशंका मजबूत होती है।

पीड़ित पिता का आरोप है कि उन्होंने नवंबर 2023 से लेकर वर्ष 2026 तक दर्जनों बार पुलिस, गृह विभाग, डीजीपी, पुलिस आयुक्त, मुख्यमंत्री कार्यालय और अन्य अधिकारियों को शिकायतें भेजीं, लेकिन अब तक उनकी किसी शिकायत पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि दो वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं की गई और उन्हें लगातार न्याय से वंचित रखा गया।

शिकायत में स्थानीय पुलिस अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पिता का दावा है कि कुछ संभावित आरोपियों को ही गवाह बना दिया गया, महत्वपूर्ण साक्ष्यों की अनदेखी की गई तथा झूठे दस्तावेज तैयार कर मामले को दुर्घटना साबित करने का प्रयास किया गया। उन्होंने संबंधित पुलिस अधिकारियों, चिकित्सकों और अन्य जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की हत्या, आपराधिक षड्यंत्र, साक्ष्य मिटाने और झूठे अभिलेख तैयार करने सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।

पीड़ित परिवार का कहना है कि उनके पास उपलब्ध कॉल रिकॉर्ड, ऑडियो रिकॉर्डिंग, सीसीटीवी फुटेज और आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों की यदि निष्पक्ष फॉरेंसिक जांच कराई जाए तो पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है। उन्होंने स्वयं और अपने परिवार की सुरक्षा की भी मांग की है।

फिलहाल इस मामले में संबंधित पुलिस विभाग या राज्य सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। समाचार में उल्लिखित सभी आरोप शिकायतकर्ता द्वारा विभिन्न अधिकारियों को भेजे गए आवेदन और दावों पर आधारित हैं। आरोपों की सत्यता की पुष्टि निष्पक्ष जांच के बाद ही संभव होगी।

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