स्पेन में बना दुनिया का पहला 100% हाइड्रोजन इंजन, क्या बिजली की संकट होगी खत्म?

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फिनलैंड की कंपनी वार्टसिला ने दुनिया का पहला 100% हाइड्रोजन इंजन बनाया है। इस इंजन की सफल टेस्टिंग हाल ही में स्पेन में हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस इंजन की क्षमता इतनी है कि भविष्य में बिजली की समस्या पूरी तरह से खत्म हो सकती है और खास तौर पर कोयले समेत अन्य खत्म होने वाले प्राकृतिक रिसोर्स पर निर्भरता पूरी तरह खत्म हो जाएगी। साथ ही, दुनियाभर में प्रदूषण की समस्या को भी निपटाया जा सकता है।

इस 100% हाइड्रोजन इंजन को ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र का सबसे क्रांतिकारी कदम बताया जा रहा है। स्पेन के बर्मेओ शहर में फिनलैंड की कंपनी वार्टसिला ने दुनिया के पहले 100% हाइड्रोजन इंजन बना लिया है। इस विशाल पावर इंजन में ईंधन के तौर पर केवल पानी का इस्तेमाल किया जाता है। इस इंजन की मदद से बिजली पैदा की जा सकेगी। इसमें बिजली बनाने के लिए न तो कोयला और न ही किसी प्राकृतिक गैस की जरूरत होगी।

यह इंजन क्यों है खास?

अभी तक जितने भी हाइड्रोजन इंजन बनाए गए हैं, वो पूरी तरह 100% हाइड्रोजन वाले नहीं थे। उन्हें चलाने के लिए पानी के साथ-साथ नेचुरल गैस की भी जरूरत होती थी। उनमें 75% हाइड्रोजन और 25% प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल किया जाता है। वार्टसिला का यह इंजन पूरी तरह यानी 100% हाइड्रोजन पर चलता है। कंपनी ने इसका नाम ‘वार्टसिला 31H2 (Wartsila 31H2)’ रखा है।

यह मॉडल किसी दूसरे इंधन पर निर्भरता को पूरी तरह खत्म कर देगा। फिनलैंड की कंपनी ने स्पेन को इस प्रोजेक्ट के लिए इसलिए चुना क्योंकि यहां पहले से ही ग्रीन एनर्जी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है। इसकी मदद से बिना प्रदूषण फैलाए और कोयले या अन्य ईंधन के बिजली बनाई जा सकेगी।

सोलर और विंड एनर्जी से भी बेहतर

इस इंजन को बिजली का सबसे रिलाएबल यानी भरोसेमंद स्त्रोत के तौर पर देखा जा रहा है क्योंकि इसमें किसी मौसम की निर्भरता नहीं रहती है। केवल पानी का इस्तेमाल किया जाएगा और बिजली पैदा की जाएगी। सोलर एनर्जी की बात करें तो यह केवल दिन के समय में ही पावर जेनरेशन कर सकता है। वहीं, कम धूप होने पर सोलर पैनल की एफिशिएंसी भी कम हो जाती है। सोलर पैनल की एक लिमिट होती है, जिसकी वजह से कुछ साल के बाद सोलर पैनल को रिप्लेस करना पड़ता है।

वहीं, विंड एनर्जी की बात करें तो उसे केवल वहीं लगाया जा सकता है, जहां खाली मैदान हो और हवा लगातार चलती रहे। किसी ऐसे जगह पवनचक्की को नहीं लगाया जा सकता है, जहां हवा नहीं चलती है या कम चलती है। ऐसे में हाइड्रोजन इंजन को भविष्य के बिजली का सबसे बड़े स्त्रोत के तौर पर देखा जा रहा है।

कैसे करता है काम?

इस इंजन को चलाने के लिए शुद्ध हाइड्रोजन गैस की जरूरत होती है। इसमें पानी को तोड़कर हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को अलग किया जाता है। हाइड्रोजन का इस्तेमाल करके इंजन में लगे  टरबाइन घुमाए जाते हैं, जो साथ लगे जेनरेटर को चलाता है। यह जेनरेटर लगातार बिजली पैदा कर सकता है। इस इंजन की खास बात ये है कि ज्यादा पानी और धूप मिलने पर हाइड्रोजन गैस को स्टोर किया जा सकेगा। बाद में इस हाइड्रोजन गैस का इस्तेमाल इंजन को चलाने के लिए निरंतर किया जा सकता है।

AI डेटा सेंटर्स के लिए वरदान

भविष्य में एआई की बढ़ती डिमांड को देखते हुए यह हाइड्रोजन इंजन एआई डेटा सेंटर को भी बिजली की सप्लाई कर सकता है। फिलहाल एआई डेटा सेंटर की बिजली के लिए न्यूक्लियर रिएक्टर का भी इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, हाइड्रोजन इंजन के आने के बाद एआई डेटा सेंटर के लिए बिजली का नया विकल्प मिल गया है।

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