अमिलियाकला में सड़क निर्माण का मामला ठंडे बस्ते में, मौका पंचनामा और किसानों की सहमति के बाद भी नहीं हुई सुनवाई

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मैहर जिले के ग्राम पंचायत अमिलियाकला में अमिलिया से गोंदहा मार्ग तक प्रस्तावित सड़क निर्माण का मामला अब ग्रामीणों के लिए बड़ी चिंता का विषय बनता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई महीनों पहले मौका पंचनामा तैयार किया गया, किसानों की सहमति ली गई, निजी भूमि स्वामियों ने सड़क निर्माण के लिए अपनी जमीन का आंशिक हिस्सा देने की अनुमति भी दे दी, इसके बावजूद आज तक प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार 29 मार्च 2025 और 23 मई 2025 को ग्राम अमिलियाकला में मौके पर निरीक्षण किया गया था। पंचों और किसानों की उपस्थिति में यह पुष्टि की गई कि अमिलिया से गोंदहा मार्ग तक सड़क निर्माण के लिए चिन्हित भूमि में कुछ हिस्सा शासकीय और कुछ निजी भूमि है। कई निजी भूस्वामियों ने बिना किसी आपत्ति के अपनी आराजी का हिस्सा सड़क निर्माण के लिए देने की सहमति दी थी।

दस्तावेज में हेलराम, शिवकुमार, गयाप्रसाद, रामचन्द्र, रामभाई, कामला प्रसाद, रमाशंकर, बद्री प्रसाद और लक्ष्मी नारायण सहित कई किसानों के नाम दर्ज हैं, जिन्होंने सड़क निर्माण के लिए अपनी भूमि देने की अनुमति प्रदान की। ग्रामीणों का कहना है कि जब जमीन देने को किसान तैयार हैं और मौका पंचनामा भी हो चुका है, तो फिर सड़क निर्माण कार्य अब तक शुरू क्यों नहीं हुआ।

जनपद पंचायत मैहर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को पत्र भेजकर आगे की कार्रवाई हेतु निर्देशित करने का अनुरोध भी किया गया था। पत्र में स्पष्ट उल्लेख है कि सड़क निर्माण के लिए भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया भू राजस्व संहिता के अनुसार शासन के नाम की जानी है, ताकि आगे निर्माण कार्य शुरू किया जा सके। इसके बावजूद मामला फाइलों में अटका हुआ दिखाई दे रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि इस सड़क के अभाव में गांव के लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के दिनों में यह मार्ग और भी बदहाल हो जाता है, जिससे स्कूली बच्चों, किसानों और मरीजों को आने जाने में कठिनाई होती है। लोगों का आरोप है कि कई बार आवेदन और शिकायत देने के बाद भी प्रशासन की ओर से कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

गांव के लोगों में इस बात को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है कि कलेक्टर कार्यालय तक आवेदन पहुंचने और अधिकारियों द्वारा निरीक्षण किए जाने के बाद भी सड़क निर्माण की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन जल्द से जल्द भूमि हस्तांतरण और निर्माण प्रक्रिया पूरी कर सड़क निर्माण कार्य प्रारंभ कराए।

यह मामला अब प्रशासनिक उदासीनता और ग्रामीण विकास कार्यों में देरी का बड़ा उदाहरण बनता जा रहा है। सवाल यह है कि जब सभी औपचारिकताएं लगभग पूरी हो चुकी हैं, तो आखिर सड़क निर्माण में देरी किस कारण हो रही है।

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