मेन रोड से गौरीशंकर तक की सड़क बनी भ्रष्टाचार की राह, 2023 में निकली राशि, अब तक नहीं बना रोड, ग्रामीणों में आक्रोश

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अमांव पंचायत का पीसीसी रोड मामला: पंचायत ने बताया अतिक्रमण, प्रशासन ने दी क्लीन चिट, फिर क्यों ठप पड़ा है निर्माण?

रीवा | ब्यूरो रिपोर्ट

जनपद पंचायत त्योंथर की ग्राम पंचायत अमांव में वर्षों से लंबित एक पीसीसी सड़क निर्माण कार्य ने एक बार फिर सिस्टम की लापरवाही और भ्रष्टाचार की कलई खोल दी है। मेन रोड से गौरीशंकर के घर तक प्रस्तावित पीसीसी सड़क के निर्माण को लेकर न केवल राशि निकासी हो चुकी है, बल्कि स्थल की वैधानिकता को भी तहसील से लेकर सीईओ तक की मुहर लग चुकी है। इसके बावजूद आज तक वहां एक ईंट तक नहीं बिछाई गई। परिणामस्वरूप ग्रामीण कीचड़, गड्ढों और दलदल से होकर गुजरने को मजबूर हैं।

2020 में बना एस्टीमेट, 2023 में निकाली गई राशि, 2025 में भी अधूरा सपना

स्थानीय निवासी विक्रम मिश्रा की शिकायत के अनुसार 2020 में ही इस रोड का एस्टीमेट तैयार कर लिया गया था। 2023 में पंचायत द्वारा निर्माण के लिए स्वीकृत राशि निकाल ली गई। शासकीय खसरा नंबर 107 पर प्रस्तावित यह रोड पूरी तरह से सरकारी जमीन पर प्रस्तावित है, जिसे लेकर तहसीलदार, एसडीएम, यहां तक कि जनपद सीईओ कार्यालय से भी यह स्पष्ट किया गया है कि भूमि पर किसी प्रकार का अतिक्रमण नहीं है।

फिर भी सरपंच और सचिव द्वारा लगातार यह तर्क दिया जा रहा है कि स्थान अतिक्रमणयुक्त है, और इसी कारण कार्य शुरू नहीं किया जा रहा। यह बयान अब झूठ और लीपापोती का हिस्सा प्रतीत हो रहा है।

कोर्ट भी दे चुका है फैसला, दोनों पक्षों पर लगा जुर्माना, अब तक नहीं हुई कार्रवाई

सूत्रों की मानें तो मामले में कोर्ट का भी फैसला आ चुका है और संबंधित दोनों पक्षों पर ₹1500 का जुर्माना लगाया जा चुका है। न्यायिक दृष्टि से भी भूमि विवाद का पटाक्षेप हो चुका है, लेकिन फिर भी कार्य शुरू न होना शासन-प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने दिए जवाब के निर्देश, कार्रवाई की चेतावनी

जनपद पंचायत त्योंथर के सीईओ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए ग्राम पंचायत अमांव के सरपंच और सचिव को तीन दिन में जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। पत्र में स्पष्ट लिखा गया है कि यदि संतोषजनक उत्तर नहीं मिला या निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हुआ, तो संबंधित जिम्मेदारों पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। राशि निकासी के बाद भी निर्माण न कराना ‘पदीय कर्तव्यों में लापरवाही, स्वेच्छाचारिता और उच्च अधिकारियों को गुमराह करने’ की श्रेणी में माना जाएगा।

ग्रामीणों में उबाल, आंदोलन की दी चेतावनी

गांव के लोगों में इस लापरवाही को लेकर गहरा आक्रोश है। ग्रामीणों ने साफ तौर पर पंचायत पर आरोप लगाया है कि जानबूझकर रोड निर्माण को टाला जा रहा है ताकि राशि की बंदरबांट की जा सके। स्थानीय निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हुआ, तो वे सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेंगे।

प्रशासन बना तमाशबीन, कोई सुनवाई नहीं

स्थानीय नागरिकों का यह भी कहना है कि उन्होंने बार-बार प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन कोई भी उनकी समस्या को गंभीरता से सुनने को तैयार नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री और कलेक्टर से गुहार लगाई है कि वे तत्काल हस्तक्षेप कर शासकीय खसरा नंबर 107 पर प्रस्तावित रोड का निर्माण कार्य शुरू कराएं।

क्या तीन दिन में मिलेगा जवाब या उठेगा अनुशासन का डंडा?

अब निगाहें टिकी हैं कि सरपंच और सचिव नियत समय में संतोषजनक जवाब देंगे या फिर शासन-प्रशासन को उनके विरुद्ध कड़ा कदम उठाना पड़ेगा। फिलहाल इस मामले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि पंचायत स्तर पर विकास कार्यों में लापरवाही अब जनजीवन को सीधे प्रभावित कर रही है, और यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं हुआ, तो इसका सामाजिक प्रभाव भी व्यापक हो सकता है।

स्थानीय संवाददाता – ई खबर मीडिया, अमांव

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