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23 साल की शादी, 10 साल से कोर्ट के चक्कर, पति की दूसरी शादी के बाद न्याय के लिए भटक रही महिला

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गाजियाबाद। जनपद गाजियाबाद के मुरादनगर थाना क्षेत्र और तहसील मोदीनगर से एक महिला की दर्दभरी कहानी सामने आई है, जो पिछले करीब 10 वर्षों से अपने अधिकार और न्याय के लिए अदालतों व सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर है। महिला का आरोप है कि विवाह के 23 वर्ष बीत जाने के बाद भी उसे न तो पति का साथ मिला और न ही वैधानिक अधिकार।

पीड़िता के अनुसार उसकी शादी करीब 23 वर्ष पहले हुई थी। शादी के बाद एक पुत्र का जन्म हुआ, लेकिन कुछ वर्षों बाद पति ने उसे छोड़ दिया। महिला का कहना है कि उसके पति की यह दूसरी शादी थी और बाद में उसने एक और विवाह कर लिया। पति द्वारा साथ छोड़ दिए जाने के बाद वह आर्थिक और सामाजिक संकट से जूझ रही है।

महिला का आरोप है कि उसके ससुराल पक्ष के पास लगभग 32 एकड़ कृषि भूमि और अन्य संपत्तियां हैं, जिनमें मकान और अन्य अचल संपत्तियां भी शामिल हैं। इसके बावजूद उसे उसके हिस्से का अधिकार नहीं दिया जा रहा है। पीड़िता का कहना है कि वह अपने और अपने बेटे के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए संपत्ति में वैधानिक अधिकार तथा भरण-पोषण की मांग कर रही है।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि महिला का मामला पिछले लगभग 10 वर्षों से न्यायालय में लंबित बताया जा रहा है। लंबे समय से चल रही कानूनी प्रक्रिया के कारण वह मानसिक, आर्थिक और सामाजिक परेशानियों का सामना कर रही है। उसका कहना है कि लगातार तारीख पर तारीख मिलने से न्याय की उम्मीद कमजोर पड़ती जा रही है।

पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसने प्रशासनिक अधिकारियों, महिला सहायता केंद्रों तथा अन्य संबंधित विभागों को कई बार प्रार्थना पत्र दिए, लेकिन अब तक उसे कोई ठोस राहत नहीं मिल सकी है। महिला का कहना है कि जीवन-यापन करना बेहद कठिन हो गया है और आर्थिक संसाधनों के अभाव में वह अपने बेटे का भविष्य भी सुरक्षित नहीं कर पा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि महिला के दावों में सच्चाई है तो प्रशासन और संबंधित विभागों को मामले की गंभीरता से जांच कर त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए। उनका मानना है कि वर्षों से लंबित विवादों के निस्तारण के लिए विशेष पहल की आवश्यकता है, ताकि पीड़ित पक्ष को समय पर न्याय मिल सके।

अब पीड़िता ने एक बार फिर प्रशासन, महिला आयोग और न्यायिक अधिकारियों से गुहार लगाई है कि उसके मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, उसे भरण-पोषण की उचित व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए तथा संपत्ति में उसके वैधानिक अधिकारों को सुनिश्चित किया जाए। महिला का कहना है कि उसे केवल न्याय चाहिए, ताकि वह सम्मानपूर्वक अपना और अपने बेटे का जीवन चला सके।

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