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निजी संपत्ति पर दबंगई का आरोप: पंचगनी में आईशा कुरेशी के गेट-दीवार तोड़े गए, सरपंच और ग्रामीणों पर धमकी देने का गंभीर मामला

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पंचगनी/महाबलेश्वर (सतारा)।
महाराष्ट्र के सतारा जिले के महाबलेश्वर अंतर्गत थाना पंचगनी क्षेत्र से निजी संपत्ति में जबरन हस्तक्षेप और तोड़फोड़ का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। बिहार जननी माता मंदिर के पास रहने वाली शिकायतकर्ता आईशा कुरेशी ने आरोप लगाया है कि 6 जनवरी 2025 को दोपहर करीब 3 से 4 बजे के बीच ग्राम पंचायत से जुड़े लोगों और ग्रामीणों के एक समूह ने उनकी निजी संपत्ति में घुसकर गेट और दीवार को नुकसान पहुंचाया तथा गंभीर धमकियां देकर मौके से चले गए।

आईशा कुरेशी के अनुसार, उन्होंने वर्ष 2018 में यह जमीन खरीदी थी। जमीन की खरीद के समय पहले मालिक द्वारा रास्ते के लिए पहले से ही 4 फीट जगह छोड़ी जा चुकी थी। इस संबंध में उनके पास मौजनी (राजस्व नक्शा/रिकॉर्ड) भी मौजूद है, जिसमें स्पष्ट रूप से दर्ज है कि रास्ते के लिए आवश्यक 4 फीट जमीन पहले ही ली जा चुकी है। इसके बावजूद अब दोबारा उनकी निजी संपत्ति से रास्ता निकालने का दबाव बनाया जा रहा है।

शिकायत में कहा गया है कि 6 जनवरी को शिवाजीराव (सरपंच), प्रवीण बिलाटे (सरपंच प्रतिनिधि) सहित करीब 15 से 20 ग्रामीण अचानक आईशा कुरेशी की संपत्ति पर पहुंचे। आरोप है कि इन लोगों ने गेट को नुकसान पहुंचाया, दीवार तोड़ी और धमकी दी कि यदि गेट नहीं हटाया गया और रास्ता नहीं छोड़ा गया, तो भविष्य में यदि वहां कोई दुर्घटना होती है, उसकी पूरी जिम्मेदारी आईशा कुरेशी पर डाली जाएगी।

आईशा कुरेशी का कहना है कि उन्होंने इस पूरे मामले को लेकर ग्राम पंचायत में लिखित शिकायत भी दी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। अपने पत्र में उन्होंने साफ तौर पर लिखा है कि यदि गेट हटवाना है तो उन्हें उचित समय दिया जाए, या फिर यह माना जाए कि गेट पूरी तरह उनकी निजी संपत्ति के भीतर स्थित है। उन्होंने यह भी मांग की है कि यदि निजी जमीन का उपयोग किया जाना है, तो उसका उचित मुआवजा दिया जाए, क्योंकि यह भूमि किसी भी तरह से सरकारी संपत्ति नहीं है।

पीड़िता का आरोप है कि यह पहली बार नहीं है जब इस तरह का दबाव बनाया गया हो। वर्तमान में आईशा कुरेशी पुणे में रहती हैं और उनकी गैरमौजूदगी का फायदा उठाकर यह पूरी कार्रवाई की जा रही है। उनके अनुसार, मौके पर केवल केयरटेकर मौजूद है, लेकिन न तो उसकी बात सुनी जा रही है और न ही संपत्ति के वास्तविक मालिक की।

आईशा कुरेशी ने यह भी आरोप लगाया कि तोड़फोड़ के दौरान घर में शॉर्ट सर्किट की स्थिति बन गई थी। केयरटेकर ने मौके पर मौजूद लोगों से काम रोकने का अनुरोध किया और बताया कि इससे आग लगने या किसी की जान को खतरा हो सकता है, लेकिन जवाब मिला कि “शॉर्ट सर्किट हो या आग लगे, हमें उससे कोई मतलब नहीं है।” इस बयान ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

आईशा कुरेशी ने मीडिया को वीडियो के माध्यम से पूरी घटना दिखाई है, जिसमें कथित तौर पर गांव के लोग और सरपंच से जुड़े व्यक्ति उनकी निजी संपत्ति के गेट को नुकसान पहुंचाते नजर आ रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले को गंभीरता से संज्ञान में लिया जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि उनकी निजी संपत्ति और जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

यह मामला अब ग्राम पंचायत की भूमिका, निजी संपत्ति के अधिकार और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। पीड़िता को अब प्रशासन और न्याय व्यवस्था से इंसाफ की उम्मीद है।

 

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