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गोरखनाथ मंदिर की दीवार तोड़कर सड़क बनाने का आरोप, विरोध करने पर घर में घुसकर मारपीट; 30 साल से पूजा कर रहीं महिला ने लगाई न्याय की गुहार

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रामपुर। जिले के शाहाबाद थाना क्षेत्र से आस्था, जमीन और मारपीट से जुड़ा एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां की रहने वाली गुलाबो देवी ने आरोप लगाया है कि गांव में स्थित प्राचीन गोरखनाथ मंदिर की दीवार को तोड़कर कुछ लोग जबरन सड़क बनाने का प्रयास कर रहे हैं। पीड़िता का कहना है कि राजस्व अभिलेखों या किसी भी सरकारी दस्तावेज में उस स्थान पर सड़क का कोई उल्लेख नहीं है, इसके बावजूद दबंगई के बल पर मंदिर की जमीन को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

गुलाबो देवी के अनुसार वह पिछले लगभग 30 वर्षों से गोरखनाथ मंदिर में नियमित रूप से पूजा-अर्चना करती आ रही हैं। मंदिर उनके लिए केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं बल्कि उनकी आस्था और विश्वास का केंद्र है। उन्होंने बताया कि हर साल 1 जनवरी को मंदिर परिसर में भंडारे का आयोजन किया जाता है, जिसमें गांव और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। इसके अलावा हर रविवार को भी मंदिर में पूजा-पाठ और प्रसाद वितरण की परंपरा चली आ रही है, जिससे ग्रामीणों की गहरी धार्मिक भावनाएं इस मंदिर से जुड़ी हुई हैं।

पीड़िता का आरोप है कि गांव के ही कुछ लोग, जिनमें केदार सिंह, लज्जा देवी, प्रताप, आकाश, मुन्नी देवी, राजेंद्र सिंह, दिनेश, देशराज, हुकुम सिंह और अन्य शामिल हैं, मंदिर की दीवार तोड़कर वहां से रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं। गुलाबो देवी का कहना है कि यदि ऐसा हुआ तो मंदिर की पवित्रता और वहां होने वाले धार्मिक आयोजनों पर गंभीर असर पड़ेगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उन्हें दबाव में लेने और डराने-धमकाने की कोशिश की गई।

पीड़िता ने मीडिया से बातचीत में बताया कि शुक्रवार की सुबह विपक्षी पक्ष के कुछ लोग उनके घर में घुस आए और उनके परिवार के साथ मारपीट की। इस घटना में गुलाबो देवी को अंदरूनी चोटें आई हैं और उनके बच्चे भी इस झगड़े की चपेट में आ गए। घटना के बाद से परिवार में दहशत का माहौल बना हुआ है।

गुलाबो देवी का कहना है कि उन्होंने इस पूरे मामले को लेकर कई बार स्थानीय प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को लिखित शिकायत दी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे वह बेहद परेशान और चिंतित हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो मंदिर की संरचना को गंभीर नुकसान हो सकता है और इससे लोगों की धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचेगी।

पीड़िता ने मीडिया के माध्यम से प्रशासन से अपील की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और मंदिर की जमीन तथा दीवार को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्होंने मांग की है कि मंदिर की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए ताकि आने वाले समय में वहां होने वाले धार्मिक आयोजन और पूजा-पाठ बिना किसी बाधा के जारी रह सकें।

 

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