नई दिल्ली/करोल बाग। राजधानी दिल्ली के करोल बाग क्षेत्र से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। पार्क में खेल रहे 11 वर्षीय मासूम की कथित तौर पर बिजली के करंट की चपेट में आने से मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि हादसे के बाद उन्हें अब तक न्याय नहीं मिला है और संबंधित अधिकारियों द्वारा उनकी शिकायत पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है।
मिली जानकारी के अनुसार, मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के रहने वाले राम अवतार वर्तमान में दिल्ली के न्यू मोती नगर-करोल बाग क्षेत्र में किराये के मकान में रहकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। बताया गया कि 9 जुलाई की शाम करीब 5 बजे उनका 11 वर्षीय पुत्र आशीष घर के पास न्यू मोतीनगर DLF एरिया में DDA पार्क स्थित है यह वह पार्क है आशीष अन्य बच्चों के साथ खेल रहा था। इसी दौरान पार्क की बाउंड्री के पास अचानक बिजली का तार गिर गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार तार में करंट प्रवाहित हो रहा था, जिसकी चपेट में आने से मासूम गंभीर रूप से झुलस गया।
घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों और परिजनों ने बच्चे को अस्पताल पहुंचाया, लेकिन चिकित्सकों ने उसे बचाने की हर संभव कोशिश के बावजूद मृत घोषित कर दिया। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में उन्हें अपने बेटे का चेहरा तक देखने नहीं दिया गया, जिससे उनका दुख और बढ़ गया। परिवार का कहना है कि हादसे के बाद से वे लगातार अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक न तो उनकी कहीं सुनवाई हुई है और न ही दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई की गई है।
मासूम की मौत के बाद परिवार पूरी तरह टूट चुका है। पिता राम अवतार का कहना है कि यदि समय रहते बिजली विभाग और संबंधित एजेंसियां सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करतीं तथा खुले या जर्जर बिजली तारों की मरम्मत कर दी जाती, तो शायद उनके बेटे की जान बच सकती थी। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तथा परिवार को न्याय दिलाने की मांग की है।
फिलहाल घटना को लेकर स्थानीय लोगों में भी भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर बिजली संबंधी सुरक्षा इंतजामों में लापरवाही भविष्य में भी बड़े हादसों का कारण बन सकती है। हालांकि, इस मामले में संबंधित विभाग और प्रशासन की ओर से आधिकारिक बयान सामने आना बाकी है। यदि परिजनों के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण बन सकता है।
