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जौनपुर जिले के बदलापुर तहसील क्षेत्र से एक बेहद मार्मिक और चिंताजनक मामला सामने आया है,

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जहां गंभीर बीमारी और आर्थिक तंगी से जूझ रहे एक युवक का परिवार जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है। सिंगरामऊ पोस्ट के अंतर्गत आने वाले मिश्रौली गांव निवासी 38 वर्षीय बलराम दुबे इन दिनों गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं और इलाज के अभाव में उनका जीवन बेहद कठिन परिस्थितियों में गुजर रहा है।

जानकारी के अनुसार बलराम दुबे काफी समय से एक गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। डॉक्टरों ने उन्हें गैंग्रीन जैसी खतरनाक बीमारी से पीड़ित बताया है। इस बीमारी के चलते उनके शरीर की हालत लगातार बिगड़ती चली गई और स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि उनके हाथ और पैर की कुछ उंगलियां भी काटनी पड़ीं। लंबे समय से इलाज चलने के बावजूद उनकी स्थिति में खास सुधार नहीं हो पाया है।

सबसे बड़ी परेशानी यह है कि बलराम दुबे की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। उनके पास न तो खेती है और न ही कोई स्थायी रोजगार का साधन। बीमारी के कारण वह खुद भी काम करने में पूरी तरह असमर्थ हो चुके हैं। ऐसे में परिवार की आजीविका का कोई साधन नहीं बचा है और घर में रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना भी मुश्किल होता जा रहा है।

परिवार की हालत और भी ज्यादा दयनीय इसलिए हो गई है क्योंकि उनके घर में डेढ़ साल का एक छोटा बच्चा भी है। बच्चे के पालन पोषण और भविष्य की चिंता बलराम दुबे को हर पल सताती रहती है। वहीं उनकी पत्नी भी मानसिक रूप से कमजोर बताई जा रही हैं, जिसके कारण परिवार की जिम्मेदारी पूरी तरह बलराम दुबे के कंधों पर ही आ गई थी, लेकिन बीमारी ने उन्हें भी लाचार बना दिया है।

ग्रामीणों का कहना है कि बलराम दुबे का परिवार बेहद गरीब है और इस समय उन्हें तत्काल आर्थिक सहायता और सरकारी मदद की सख्त जरूरत है। गांव के लोगों ने बताया कि कई बार स्थानीय स्तर पर मदद करने की कोशिश की गई, लेकिन बीमारी का इलाज इतना महंगा है कि बिना सरकारी सहयोग के यह संभव नहीं हो पा रहा है।

पीड़ित बलराम दुबे ने प्रशासन और समाज के सक्षम लोगों से मदद की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि यदि सरकार या समाज के लोग उनकी मदद करें तो वह अपना इलाज बेहतर तरीके से करा सकते हैं और अपने छोटे से परिवार को किसी तरह संभाल सकते हैं।

ग्रामीणों ने भी प्रशासन से मांग की है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता, इलाज की व्यवस्था और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जाए, ताकि एक गंभीर बीमारी से जूझ रहे व्यक्ति और उसके मासूम बच्चे का भविष्य सुरक्षित किया जा सके।

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