मुजफ्फरनगर।
जनपद मुजफ्फरनगर के तितावी क्षेत्र से दहेज उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना और वैवाहिक विवाद का एक गंभीर मामला सामने आया है। पीड़िता सोनम ने अपने पति एहसान, सास शाहिदा, ससुर चांद तथा अन्य ससुरालीजनों पर दहेज की लगातार मांग करने, मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और घर से निकालने की कोशिश करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता ने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाते हुए निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
सोनम के अनुसार उसकी शादी करीब छह वर्ष पूर्व पूरे रीति-रिवाज और सामाजिक परंपराओं के साथ एहसान से हुई थी। पीड़िता का दावा है कि उसके माता-पिता ने शादी में लगभग 10 लाख रुपये खर्च किए थे और घरेलू उपयोग का आवश्यक सामान, फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तथा अन्य उपहार भी दिए थे। इसके बावजूद ससुराल पक्ष की ओर से अतिरिक्त दहेज की मांग की जाती रही।
पीड़िता का आरोप है कि शादी के शुरुआती दो महीने तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन उसके बाद दहेज को लेकर विवाद शुरू हो गया। ससुराल पक्ष कथित रूप से कार की मांग करने लगा और मांग पूरी न होने पर उसे अपमानित किया जाने लगा। सोनम का कहना है कि कई बार उसे तलाक देने और घर से निकालने की धमकियां भी दी गईं।
विवाहिता ने अपने पति पर एक अन्य महिला रेशमा के साथ अवैध संबंध होने का भी आरोप लगाया है। उसका कहना है कि यह संबंध शादी से पहले से था और विवाह के बाद भी जारी रहा। पीड़िता का आरोप है कि इसी वजह से उसे लगातार मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी और उसे परिवार से अलग करने की कोशिश की गई।
सोनम ने यह भी आरोप लगाया कि उसके सास-ससुर और अन्य परिजन अक्सर उस पर दबाव बनाते थे कि वह अपने मायके से कार लेकर आए, अन्यथा ससुराल में रहने का अधिकार नहीं है। पीड़िता के अनुसार जब वह गर्भवती हुई और बाद में उसके बेटे का जन्म हुआ, तब भी उसके इलाज, दवाइयों और प्रसव का पूरा खर्च उसके माता-पिता ने उठाया, जबकि ससुराल पक्ष ने कोई सहयोग नहीं किया।
पीड़िता का कहना है कि आज उसका बेटा चार वर्ष का हो चुका है, लेकिन उसके पति ने न तो बच्चे की जिम्मेदारी उठाई और न ही परिवार के भरण-पोषण में कोई विशेष सहयोग किया। उसने आरोप लगाया कि उसे कई बार घर से निकाल दिया गया, जिसके कारण वह अपने छोटे बेटे के साथ दर-दर भटकने को मजबूर हो गई।
मामले को और गंभीर बनाते हुए सोनम ने दावा किया कि शादी में दिया गया कई लाख रुपये का सामान भी कथित रूप से तोड़फोड़ कर नष्ट कर दिया गया। इसके बावजूद दहेज की मांग बंद नहीं हुई और लगातार कार तथा अन्य सामान की मांग कर उसे परेशान किया जाता रहा।
पीड़िता का कहना है कि उसने कई बार संबंधित अधिकारियों और पुलिस से शिकायत कर न्याय की मांग की, लेकिन अब तक उसे अपेक्षित राहत नहीं मिल सकी है। उसने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि उसे और उसके मासूम बेटे को न्याय मिल सके।
वहीं, इस मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। संबंधित पक्ष का आधिकारिक बयान और जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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