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सूची में नाम होने के बावजूद नहीं मिला आवास: झांसी का परिवार कच्चे मकान में रहने को मजबूर, 1076 पर शिकायत के बाद भी नहीं हुई सुनवाई

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झांसी जिले से प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़ा एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां सूची में नाम होने के बावजूद एक गरीब परिवार को अब तक आवास का लाभ नहीं मिल पाया है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि कई महीनों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने और शिकायत दर्ज कराने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। ऐसे में परिवार आज भी जर्जर कच्चे मकान में रहने को मजबूर है और हर बारिश में उन्हें बड़े खतरे के बीच जिंदगी गुजारनी पड़ती है।

जानकारी के अनुसार झांसी जिले के बीरपुरा गांव निवासी गोविंद दास ने बताया कि वह बेहद गरीब परिवार से आते हैं और वर्षों से कच्चे मकान में रहकर जीवन यापन कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची में उनका नाम शामिल है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अब तक योजना का लाभ नहीं दिया गया। इस संबंध में उन्होंने करीब पांच महीने पहले संबंधित अधिकारियों को आवेदन दिया था, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

पीड़ित गोविंद दास के अनुसार उन्होंने अपनी समस्या को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार के शिकायत पोर्टल और हेल्पलाइन नंबर 1076 पर भी शिकायत दर्ज कराई थी। उन्हें उम्मीद थी कि वहां से उनकी समस्या का समाधान होगा, लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी कोई अधिकारी उनकी शिकायत पर ध्यान देने नहीं आया। इससे परिवार में निराशा और चिंता बढ़ती जा रही है।

गोविंद दास ने बताया कि उनका परिवार एक ही छोटे और जर्जर कच्चे मकान में रहने को मजबूर है, जहां लगभग छह से सात लोग एक साथ रहते हैं। मकान की हालत इतनी खराब है कि बरसात के दिनों में छत टपकने लगती है और दीवारें भी कमजोर हो जाती हैं। ऐसे हालात में परिवार के सदस्यों को हर समय मकान गिरने का डर सताता रहता है।

पीड़ित का कहना है कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह खुद नया मकान बनवाने में सक्षम नहीं हैं। इसलिए उन्हें सरकार की आवास योजना से बड़ी उम्मीद थी, लेकिन लगातार प्रयासों के बावजूद उन्हें अब तक कोई लाभ नहीं मिला। उनका आरोप है कि स्थानीय स्तर पर उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।

गोविंद दास ने प्रशासन और सरकार से अपील की है कि उनकी समस्या को गंभीरता से सुना जाए और जल्द से जल्द उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिया जाए। उनका कहना है कि यदि उन्हें समय पर सहायता मिल जाए तो उनका परिवार सुरक्षित घर में रह सकेगा और बच्चों का भविष्य भी बेहतर हो सकेगा।

अब देखना होगा कि यह मामला सामने आने के बाद संबंधित अधिकारी क्या कदम उठाते हैं और क्या गरीब परिवार को आखिरकार सरकारी योजना का लाभ मिल पाता है या नहीं।

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