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बिजली बिल का झटका: हर महीने बिल भरने के बाद भी 86 हजार की मांग, उपभोक्ता ने लगाया विभाग पर मनमानी का आरोप

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करनाल। हरियाणा के करनाल जिले से बिजली बिल को लेकर एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। स्टॉन्डी क्षेत्र के रहने वाले जोगिंदर ने बिजली विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वह लंबे समय से नियमित रूप से बिजली बिल का भुगतान करते रहे हैं, इसके बावजूद अचानक उनसे भारी-भरकम बकाया राशि मांगी जा रही है। पीड़ित का कहना है कि इस मामले में उन्हें लगातार नोटिस देने और दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है, जिससे वह बेहद परेशान हो चुके हैं।

जोगिंदर, जो रघबीर सिंह के पुत्र हैं और करनाल के स्टॉन्डी इलाके में रहते हैं, का कहना है कि पहले उनके घर का बिजली बिल हर महीने लगभग 200 से 400 रुपये के बीच आता था और वह समय-समय पर उसका भुगतान भी करते थे। लेकिन कुछ समय पहले बिजली विभाग ने अचानक कई महीनों की एक साथ रीडिंग निकालते हुए करीब 86 हजार रुपये का बिल बना दिया और उसे जमा करने के लिए कहा।

पीड़ित का कहना है कि इतनी बड़ी राशि एक साथ भर पाना उनके लिए संभव नहीं था। इसके बाद उन्होंने विभाग से बातचीत कर किस्तों में भुगतान करने की व्यवस्था कराई, जिसके तहत हर महीने लगभग 10,740 रुपये जमा करने की बात तय हुई। जोगिंदर के अनुसार उन्होंने अब तक करीब 54 हजार रुपये तक की राशि जमा भी कर दी है और एक-दो किस्तें समय पर भर दी थीं।

हालांकि जोगिंदर का आरोप है कि पिछले महीने आर्थिक तंगी के कारण वह भुगतान करने में थोड़ा देर हो गए। जब वह 9 अप्रैल को किस्त जमा करने पहुंचे तो विभाग ने पैसे लेने से इनकार कर दिया और कहा कि अब पूरी बाकी राशि एक साथ जमा करनी होगी। इतना ही नहीं, उन्हें नोटिस जारी करने और कनेक्शन काटने की भी चेतावनी दी जा रही है।

पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि बिल की गणना में भी गड़बड़ी दिखाई दे रही है। उनके अनुसार अब तक करीब 54 हजार रुपये जमा करने के बावजूद विभाग की ओर से बताया जा रहा है कि अभी भी लगभग 59 हजार रुपये बाकी हैं। इस तरह करीब चार से पांच हजार रुपये की अतिरिक्त गड़बड़ी सामने आ रही है, जिसे लेकर वह और ज्यादा परेशान हो गए हैं।

जोगिंदर का कहना है कि वह नियमित रूप से हर महीने बिजली का बिल भरते रहे हैं, इसके बावजूद अचानक इतनी बड़ी राशि थोप दी गई और अब किस्तों में भुगतान करने की अनुमति भी नहीं दी जा रही। उन्होंने प्रशासन और बिजली विभाग के उच्च अधिकारियों से अपील की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और उन्हें राहत दिलाई जाए, क्योंकि लगातार नोटिस और दबाव के कारण वह मानसिक रूप से काफी परेशान हो चुके हैं।

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