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लिव इन पार्टनर को घर ले गए परिजन, युवक का आरोप– खुशी से साथ रहना चाहते हैं दोनों, परिवार कर रहा विरोध

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राजस्थान में लिव इन रिलेशनशिप से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जिसमें एक युवक ने आरोप लगाया है कि वह अपनी महिला साथी के साथ पिछले चार से पांच वर्षों से खुशी-खुशी रह रहा था और दोनों भविष्य में विवाह करने की योजना बना रहे थे। लेकिन महिला के परिजन उसे अपने साथ घर ले गए, जिसके बाद युवक ने प्रशासन से हस्तक्षेप कर दोनों बालिगों को अपनी इच्छा के अनुसार साथ रहने का अधिकार दिलाने की मांग की है।

जानकारी के अनुसार सुदर्शन मूल रूप से उत्तर प्रदेश के फैजाबाद के रहने वाले हैं। वह पिछले चार से पांच वर्षों से राजस्थान की एक कंपनी में नौकरी कर रहे हैं। इसी दौरान उनकी मुलाकात 28 वर्षीय रीना कुमारी से हुई। बताया जा रहा है कि दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और दोनों आपसी सहमति से लिव इन रिलेशनशिप में रहने लगे। युवक का कहना है कि दोनों अपनी मर्जी से साथ रह रहे थे और समय आने पर विवाह करने का भी निर्णय लिया था।

युवक के अनुसार, कुछ दिन पहले रीना के माता-पिता राम लहोरी और रूपा देवी राजस्थान पहुंचे और रीना को अपने साथ घर ले गए। इससे परेशान होकर सुदर्शन रीना के घर पहुंचा और उसके माता-पिता से बातचीत कर उसे वापस भेजने का आग्रह किया। युवक का आरोप है कि वहां उसके साथ अभद्र व्यवहार किया गया, धक्का देकर घर से बाहर निकाल दिया गया तथा पुलिस बुलाने की बात कही गई।

सुदर्शन का कहना है कि यदि दो बालिग युवक-युवती अपनी स्वतंत्र इच्छा से साथ रहना चाहते हैं तो किसी को भी उनके व्यक्तिगत जीवन में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। उनका कहना है कि वह और रीना दोनों अपनी मर्जी से साथ रहना चाहते हैं और किसी प्रकार का दबाव स्वीकार नहीं करना चाहते।

युवक ने प्रशासन से मांग की है कि यदि रीना भी अपनी इच्छा से उसके साथ रहना चाहती है तो उसे स्वतंत्र रूप से अपना निर्णय लेने का अवसर दिया जाए। साथ ही दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए ताकि किसी प्रकार का दबाव, धमकी या सामाजिक उत्पीड़न न हो।

कानूनी जानकारों के अनुसार, यदि युवक और युवती दोनों बालिग हैं और अपनी स्वतंत्र इच्छा से साथ रहना चाहते हैं, तो भारतीय कानून उन्हें ऐसा करने का अधिकार देता है। ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार के दबाव या जबरन अलग करने की शिकायत मिलने पर प्रशासन तथ्यों की जांच कर संबंधित पक्षों की सुरक्षा और अधिकारों के संरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठा सकता है।

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