मथुरा। मथुरा में कथित माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे एक व्यक्ति का दर्दनाक मामला सामने आया है। ग्राम नौगांव थाना छाता निवासी ठाकुर भगवान सिंह पिछले करीब 50 महीनों से कथित आपराधिक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। उनका आरोप है कि जिले के दो कथित हिस्ट्रीशीटर अपराधियों के खिलाफ कई गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज होने के बावजूद प्रभावशाली संरक्षण के कारण उनके खिलाफ गैंगस्टर और रासुका जैसी सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही है।
भगवान सिंह का कहना है कि उन्होंने 28 दिसंबर 2022 से मथुरा कचहरी परिसर में एसएसपी आवास के पास वट वृक्ष के नीचे परिवार सहित अनिश्चितकालीन सत्याग्रह शुरू किया था। उनका आरोप है कि मथुरा जंक्शन रेलवे स्टेशन क्षेत्र में कथित रूप से गुंडा टैक्स और अवैध वसूली का नेटवर्क चलाया जा रहा है, जिसमें कुछ प्रभावशाली लोगों का संरक्षण भी शामिल है। इस संबंध में उन्होंने कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर उच्च पुलिस अधिकारियों तक शिकायतें दीं और जांच भी कराई गई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।

इस संघर्ष के बीच 1 जनवरी 2026 को भगवान सिंह के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उनके इकलौते बेटे की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई, जिसके बाद उन्हें मजबूरी में अपना सत्याग्रह स्थगित करना पड़ा। भगवान सिंह का आरोप है कि यह केवल दुर्घटना नहीं बल्कि साजिश भी हो सकती है, इसलिए पूरे मामले की विशेष जांच टीम (SIT) से जांच कराई जानी चाहिए। उनका कहना है कि अगर निष्पक्ष जांच हो तो बेटे की मौत के पीछे की सच्चाई सामने आ सकती है।
भगवान सिंह ने आरोप लगाया कि वे कई बार पुलिस महानिदेशक कार्यालय तक पहुंचे, लेकिन उन्हें मुख्यमंत्री से मिलने तक नहीं दिया गया। उनका कहना है कि वे जनहित में छह सूत्रीय मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं और अगर उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे 1 मई 2026 से फिर से अनिश्चितकालीन सत्याग्रह शुरू करेंगे। इसके लिए मथुरा, आगरा, लखनऊ या नई दिल्ली के जंतर-मंतर में से किसी एक स्थान पर धरने की योजना बनाई जा रही है।
प्रार्थी ने अपनी मांगों में आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर और रासुका के तहत कार्रवाई, उच्च स्तरीय जांच रिपोर्टों का पालन और किसी माननीय न्यायाधीश की निगरानी में एसआईटी जांच कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांगों को अनदेखा किया गया तो वे दोबारा परिवार सहित धरने पर बैठने को मजबूर होंगे।
इस मामले में उन्होंने प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, प्रमुख गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक, एडीजी आगरा जोन, जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मथुरा सहित कई उच्च अधिकारियों को भी शिकायत भेजकर कार्रवाई की मांग की है। वहीं पूरे मामले ने जिले में प्रशासनिक कार्यप्रणाली और कथित आपराधिक संरक्षण को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।