गैंगस्टर गोल्डी ढिल्लों जो 15 लाख का इनामी है, उसे स्पेन में पंजाब एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स के इनपुट पर पकड़ा गया। गोल्डी ढिल्लों पर भारत से लेकर कनाडा तक कई वारदातों में शामिल होने का आरोप है।
पंजाब एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स के इनपुट पर गैंगस्टर गोल्डी ढिल्लों स्पेन में पकड़ा गया। स्पेन की सुरक्षा एजेंसियों ने गोल्डी ढिल्लों को हिरासत में लिया। बता दें कि गैंगस्टर गोल्डी ढिल्लों बीते 13 जून को चंडीगढ़ के सेक्टर-11 स्थित श्री कुमार मेडिकल हॉल के कैशियर जानकी दास की गोली मारकर हत्या करवाने का आरोपी है। गैंगस्टर गोल्डी ढिल्लों पहले लॉरेंस बिश्नोई के साथ जुड़ा था लेकिन अब वह लॉरेंस बिश्नोई का एंटी है।
पंजाब टू कनाडा फायरिंग की कई घटनाओं में गोल्डी का हाथ
कनाडा में हुई फायरिंग की कई घटनाओं में गोल्डी ढिल्लों का हाथ था। पंजाब में भी संगठित अपराध की कई घटनाओं में गोल्डी ढिल्लों आरोपी है। पंजाब पुलिस की लंबे वक्त से विदेश में गोल्डी ढिल्लों की गिरफ्तारी के ऑपरेशन के लिए मौजूद थी और अब गोल्डी ढिल्लों, स्पेन के Madrid शहर से गिरफ्तार हुआ है।
लॉरेंस बिश्नोई का एंटी है गोल्डी ढिल्लों
गोल्डी ढिल्लों NIA का वांटेड आरोपी भी है और उसके ऊपर 10 लाख का इनाम है। इसके अलावा, 5 लाख का इनाम पंजाब पुलिस ने भी उसके ऊपर घोषित किया हुआ है। गौलतलब है कि गैंगस्टर गोल्डी ढिल्लों पहले गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई गैंग का हिस्सा था, लेकिन बाद में दोनों में विवाद हो गया और गोल्डी ढिल्लों, लॉरेंस बिश्नोई का विरोधी बन गया। जांच एजेंसियों के मुताबिक, कनाडा में फायरिंग की कईं वारदातें हुईं, जिसमें गोल्डी ढिल्लों का नाम सामने आया था।
प्रत्यर्पण के तहत भारत लाया जा सकता है गोल्डी ढिल्लों
सूत्रों के अनुसार, अब गोल्डी ढिल्लों की वतन वापसी की कानूनी प्रक्रिया पर भी भारत की एजेंसियां जल्द काम शुरू कर सकती हैं। अगर प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पूरी होती है, तो गोल्डी ढिल्लों से पंजाब और अन्य राज्यों में हुए कई अपराध और गैंगवार की घटनाओं के संबंध में पूछताछ हो सकती है। जांच एजेंसियों को आशा है कि गोल्डी ढिल्लों से कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिल सकती हैं।
24 साल पहले साइन हुई थी भारत-स्पेन में प्रत्यर्पण संधि
जान लें कि भारत-स्पेन में प्रत्यर्पण संधि है, जिस पर 2002 को मैड्रिड में साइन हुए थे। प्रत्यर्पण संधि, भारत और स्पेन के बीच आतंक, संगठित अपराध और अन्य जघन्य अपराधों से निपटने व भगोड़े अपराधियों को कटघरे में लाने के लिए कानूनी इन्फ्रास्ट्रक्चर देती है। प्रत्यर्पण संधि आधिकारिक रूप से 2003 से पूरी तरह लागू हुई थी।

