10 साल की सेवा के बाद नौकरी पर संकट: महिला कर्मचारी ने लगाए उत्पीड़न के गंभीर आरोप, प्रबंधन से निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग

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दादरी/नोएडा। नोएडा स्थित एक निजी संस्थान में हाउसकीपिंग कर्मचारी के रूप में पिछले लगभग दस वर्षों से कार्यरत दादरी निवासी हेमलता ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों और कुछ कर्मचारियों पर मानसिक उत्पीड़न, अभद्र व्यवहार तथा नौकरी से हटाने की कथित साजिश रचने के गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला का कहना है कि वह पिछले एक दशक से पूरी ईमानदारी और मेहनत के साथ अपनी सेवाएं दे रही हैं, लेकिन पिछले कुछ समय से उन्हें लगातार निशाना बनाया जा रहा है। दूसरी ओर कंपनी द्वारा उन्हें जारी कारण बताओ नोटिस में उन पर अनुशासनहीनता, सुपरवाइजर के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करने और प्रबंधक को कथित रूप से धमकी देने के आरोप लगाए गए हैं।

हेमलता ने बताया कि उनके पति पिछले करीब दस वर्षों से परिवार से अलग हैं। उनकी दो बेटियां—17 वर्षीय निक्की और 14 वर्षीय नेहा—पूरी तरह उनकी आय पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि परिवार के पालन-पोषण, बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा के खर्च का एकमात्र सहारा उनकी नौकरी है। ऐसे में यदि उनकी नौकरी चली जाती है तो पूरा परिवार आर्थिक संकट में आ जाएगा।

महिला कर्मचारी का आरोप है कि सुपरवाइजर अंकित, मोनू भाटिया तथा अन्य कुछ कर्मचारियों द्वारा लंबे समय से उनके साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है। उनका दावा है कि उन्हें बार-बार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और अपमानित किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक महिला सुपरवाइजर द्वारा कथित रूप से उनके चेंजिंग रूम का वीडियो बनाकर अन्य वरिष्ठ कर्मचारियों को दिखाया गया। महिला का कहना है कि यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो सच्चाई सामने आ सकती है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

हेमलता का आरोप है कि कर्मचारियों के वेतन वृद्धि को लेकर हुए धरना-प्रदर्शन में सक्रिय रहने के बाद से उन्हें लगातार निशाना बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि कुछ अधिकारी उनके नाम का उल्लेख करते हुए उन्हें नौकरी से हटाने की बात करते हैं और लगातार मानसिक दबाव बनाया जा रहा है।

महिला ने यह भी दावा किया कि 22 जून को एक पारिवारिक शादी में शामिल होने के लिए छुट्टी मांगने के बाद से उनके प्रति अधिकारियों का रवैया और अधिक कठोर हो गया। उनका आरोप है कि उन्हें काम देने के बजाय “नो एंट्री” की स्थिति में बैठा दिया गया, जिससे उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।

हेमलता का यह भी आरोप है कि विभिन्न विभागों के कुछ कर्मचारियों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया जिसमें से अंकित सुपरवाइजर है जो कि गलत कमेंट करता है और बंदे इशारे करता है हेमलता को एचआर डिपार्टमेंट के कुछ कर्मचारियों ने कथित रूप से हाथापाई भी की। उन्होंने इन सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच संस्थान के ए-ब्लॉक (द्वितीय तल) के कुछ पीएचडी शोधार्थियों ने हेमलता के समर्थन में एक लिखित पत्र जारी किया है। पत्र में कहा गया है कि हेमलता अपना कार्य पूरी मेहनत, जिम्मेदारी और ईमानदारी से करती हैं तथा उनका व्यवहार सभी के प्रति सम्मानजनक और सहयोगपूर्ण रहा है। शोधार्थियों ने उन्हें एक समर्पित और अनुशासित कर्मचारी बताया है।

कंपनी की ओर से 9 जून 2026 को जारी कारण बताओ नोटिस में कहा गया है कि 3 जून 2026 को हेमलता ने कथित रूप से अपने सुपरवाइजर के प्रति अभद्र भाषा का प्रयोग किया तथा प्रबंधक को शारीरिक नुकसान पहुंचाने की धमकी दी। नोटिस में वर्ष 2019 से 2026 के बीच जारी कई चेतावनी पत्रों का भी उल्लेख किया गया है और 48 घंटे के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है। नोटिस में यह भी कहा गया है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कंपनी उपलब्ध तथ्यों के आधार पर अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकती है।

हेमलता ने संस्थान के उच्च प्रबंधन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने, उनके द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच कराने तथा उन्हें पुनः सुरक्षित वातावरण में सम्मानपूर्वक कार्य करने का अवसर देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद है और वे चाहती हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

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