डीडवाना-कुचामन।
कुचामन सिटी में भारतीय सेना के सेवारत सैनिक हरिओम कुमावत और उनके परिवार पर अवैध कब्जा, अतिक्रमण और पुलिसिया उत्पीड़न का गंभीर मामला सामने आया है। हरिओम कुमावत ने जिला मजिस्ट्रेट पुखराज सेन (IAS) को शिकायत पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है।
पड़ोसियों ने घर की जमीन पर किया अवैध कब्जा
हरिओम कुमावत के अनुसार, उनके पड़ोसी भैरूलाल, कैलाश चंद, सुरेश, गोपाल, चंदा देवी, संगीता, सुनिता, दुर्गा, संतोष और सुमन ने मिलकर उनके मकान के 165 वर्ग फीट क्षेत्र पर अवैध कब्जा कर लिया। आरोपियों ने जबरन एक कमरा, बालकनी, दरवाजा और जगला बना लिया। इतना ही नहीं, सार्वजनिक रास्ते को भी अवरुद्ध कर सीसीटीवी कैमरे तक लगा दिए, जिससे सैनिक परिवार की निजता और सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।
नगर परिषद और पुलिस पर मिलीभगत के आरोप
सैनिक ने आरोप लगाया कि नगर परिषद के कुछ अधिकारियों ने फर्जी दस्तावेज और पट्टे बनवाकर सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करवा दिया। जब परिवार ने विरोध किया, तो कुचामन सिटी पुलिस ने अतिक्रमणकारियों का साथ दिया और सैनिक परिवार को ही प्रताड़ित करने लगी।
पुलिस ने घर में घुसकर किया हमला, बुजुर्गों और बच्चों पर अत्याचार
हरिओम कुमावत का आरोप है कि थानाधिकारी सुरेश कुमार चौधरी, पुलिसकर्मी बनवारी लाल, लाल सिंह, बजरंग सिंह, छोटूराम खिचड़ (FC No. 877) ने उनके घर में घुसकर मारपीट की।
महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को बेरहमी से पीटा गया।
संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया।
हरिओम और उनके पिता को अवैध रूप से हिरासत में लेकर 41 घंटे तक टॉर्चर किया गया।
सीसीटीवी कैमरों के कनेक्शन काट दिए गए ताकि पुलिसिया ज्यादती के सबूत मिटाए जा सकें।
झूठे मुकदमों की साजिश, बलात्कार जैसे संगीन आरोपों में फंसाने की धमकी
हरिओम कुमावत का कहना है कि जब भी वे न्याय के लिए आवाज उठाते हैं, तो पुलिस उनके खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज कर देती है। यहां तक कि पड़ोसी उन पर सामूहिक बलात्कार जैसे झूठे आरोप लगाकर बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं।
2020 में हुआ था अतिक्रमण हटाने का आदेश, अब तक नहीं हुई कार्रवाई
एसडीएम कुचामन सिटी ने 6 नवंबर 2020 को अवैध कब्जा हटाने का आदेश दिया था। नगर परिषद ने केवल 10% कब्जा हटाया, लेकिन 90% अतिक्रमण अब भी बरकरार है।
न्याय की गुहार, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग
हरिओम कुमावत ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री, गृह मंत्री, मानवाधिकार आयोग, सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट, डीजीपी, आईजी, बार काउंसिल और प्रधानमंत्री कार्यालय तक शिकायतें भेजी हैं। उन्होंने दोषी पुलिसकर्मियों को निलंबित करने और अवैध कब्जा हटाने की मांग की है।
“एक सैनिक देश की रक्षा के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर देता है, लेकिन जब वह और उसका परिवार ही सुरक्षित नहीं रहेगा, तो यह पूरे देश के लिए शर्मनाक बात है।” – हरिओम कुमावत
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और सरकार इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।
