सुलतानपुर में जमीन विवाद ने पकड़ा तूल, ग्राम प्रधान और पुलिस पर प्रताड़ना के गंभीर आरोप

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सुलतानपुर। जिले के कूरेभार थाना क्षेत्र के कौड़ियावा गांव में जमीन विवाद अब प्रशासनिक और पुलिस कार्यवाही पर गंभीर सवाल खड़े करने लगा है। एक दिव्यांग युवक ने ग्राम प्रधान, पुलिस कर्मियों और राजस्व कर्मचारियों पर मिलीभगत, प्रताड़ना, मारपीट और फर्जी मुकदमों में फंसाने की धमकी देने जैसे सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। पीड़ित ने मुख्यमंत्री से लेकर पुलिस महानिरीक्षक तक शिकायत भेजकर जानमाल की सुरक्षा की गुहार लगाई है।

कौड़ियावा निवासी केश कुमार यादव ने अपने शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि उनके भाई अजय कुमार यादव ने अपनी हिस्से की जमीन का बैनामा ग्राम उमरी निवासी बबिता पत्नी चन्दन राणा के नाम किया था, लेकिन बैनामे में गलत चौहद्दी दर्शाकर दूसरे भाई की जमीन को शामिल कर लिया गया। पीड़ित का दावा है कि परिवार के बीच पैतृक संपत्ति का बंटवारा पहले ही हो चुका था, बावजूद इसके अब उनकी जमीन पर कब्जे का प्रयास किया जा रहा है।

पीड़ित ने ग्राम प्रधान चन्दन राणा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वह अपने राजनीतिक प्रभाव और दबंगई के दम पर जमीन कब्जाने का प्रयास कर रहा है। शिकायत में चन्दन राणा को “अपराधिक भूमाफिया” बताते हुए आरोप लगाया गया है कि उसने अपने पद का दुरुपयोग कर भारी अचल संपत्ति अर्जित की है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। केश कुमार का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो उनके साथ कोई बड़ी घटना हो सकती है।

मामले में पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। पीड़ित ने आरोप लगाया कि थाना कूरेभार के तत्कालीन एसआई राजेश कुमार यादव और अन्य पुलिसकर्मियों ने विपक्षी पक्ष से मिलकर उन्हें लगातार प्रताड़ित किया। आरोप है कि 11 दिसंबर 2025 को उन्हें थाने बुलाकर दीवान और सिपाही के साथ मिलकर बुरी तरह पीटा गया। इतना ही नहीं, मेडिकल जांच के दौरान एक्स-रे रेफर पर्ची तक पुलिसकर्मी अपने साथ ले गए और शिकायत वापस न लेने पर फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई।

केश कुमार यादव, जो खुद को 45 प्रतिशत दिव्यांग बताते हैं, ने कहा कि वह छोटी मैकेनिक की दुकान चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। उनका आरोप है कि बार-बार थाने बुलाकर एकपक्षीय कार्रवाई की गई और BNS की धाराओं में चालान कर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। पीड़ित ने दावा किया कि उनके पास फोन कॉल की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी मौजूद है, जिसमें समझौते का दबाव बनाया जा रहा था।

वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक जांच में मामले को प्रथम दृष्टया सिविल प्रकृति का बताया गया है। जांच आख्या में कहा गया कि भूमि विवाद को लेकर दोनों पक्षों के बीच चौहद्दी और कब्जेदारी का विवाद है तथा पीड़ित को न्यायालय में वाद दाखिल कर कानूनी राहत लेने की सलाह दी गई है। पुलिस की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि विपक्षी पक्ष की शिकायत पर केश कुमार और उनके भाई के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र भी दाखिल किया जा चुका है।

हालांकि पीड़ित परिवार प्रशासनिक जांच से संतुष्ट नहीं है। उनका कहना है कि स्थानीय स्तर पर निष्पक्ष सुनवाई नहीं हो रही और प्रभावशाली लोगों के दबाव में कार्रवाई की जा रही है। परिवार ने मुख्यमंत्री, पुलिस अधीक्षक, डीआईजी और आईजी से मांग की है कि मामले की जांच किसी दूसरे जिले के वरिष्ठ अधिकारियों से कराई जाए ताकि निष्पक्ष न्याय मिल सके।

गांव और आसपास के इलाके में यह मामला अब चर्चा का विषय बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि जमीन विवाद अब राजनीतिक और प्रशासनिक प्रभाव के कारण और अधिक उलझता जा रहा है। पीड़ित परिवार लगातार सुरक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है।

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