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उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड हाईवे के लिए जमीन अधिग्रहण पर किसानों का विरोध, बोले- उचित मुआवजा मिले, मुख्यमंत्री लें संज्ञान

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उज्जैन-जावरा के मध्य प्रस्तावित 4 लेन पेव्हड शोल्डर ग्रीनफील्ड हाईवे परियोजना के लिए किए जा रहे भूमि अधिग्रहण को लेकर प्रभावित किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्राम गुरला, तहसील उन्हेल के किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि उनकी कृषि भूमि के बदले उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए तथा उनकी बात गंभीरता से सुनी जाए। किसानों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी मामले में हस्तक्षेप करने की मांग उठाई है।

प्रभावित किसानों का कहना है कि उनकी जमीन ही परिवार की आजीविका का एकमात्र साधन है। प्रस्तावित सड़क निर्माण के लिए उनकी अधिकांश कृषि भूमि अधिग्रहित की जा रही है, लेकिन उन्हें मिलने वाला मुआवजा उनकी अपेक्षाओं और जमीन के वास्तविक मूल्य के अनुरूप नहीं है। ऐसे में परिवार के सामने भविष्य को लेकर गंभीर चिंता खड़ी हो गई है।

जानकारी के अनुसार ग्राम गुरला स्थित सर्वे नंबर 206/2/1, रकबा 0.4000 हेक्टेयर भूमि में से लगभग 0.35 हेक्टेयर भूमि सड़क निर्माण परियोजना के लिए अधिग्रहित किए जाने की प्रक्रिया चल रही है। इसी भूमि पर किसानों के सिंचाई संसाधन, ट्यूबवेल और कुआं भी मौजूद हैं। किसानों का कहना है कि जमीन के साथ-साथ उनकी वर्षों की मेहनत और आजीविका भी प्रभावित हो रही है।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि उन्होंने पूर्व में भी अपनी आपत्तियां संबंधित अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत की थीं, लेकिन उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। अब वे चाहते हैं कि प्रशासन उनकी परिस्थितियों को समझे और उन्हें ऐसा मुआवजा प्रदान करे जिससे वे अपने परिवार का भविष्य सुरक्षित कर सकें।

किसानों का कहना है कि प्रदेश सरकार लगातार किसानों के हित में योजनाएं चला रही है और किसानों की आय बढ़ाने के लिए अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में यदि किसी किसान की उपजाऊ भूमि अधिग्रहित की जाती है और बदले में उसे उचित मुआवजा नहीं मिलता, तो यह उसके साथ न्याय नहीं माना जा सकता। किसानों का सवाल है कि जब सरकार किसानों को सशक्त बनाने की बात करती है तो फिर प्रभावित किसानों की आवाज क्यों नहीं सुनी जा रही है।

प्रभावित परिवार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मामले का संज्ञान लेने की अपील करते हुए कहा है कि उन्हें विकास कार्यों से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन विकास की कीमत किसानों के भविष्य और उनके जीवनयापन पर भारी नहीं पड़नी चाहिए। किसानों की मांग है कि प्रशासन पुनर्मूल्यांकन कर उन्हें न्यायसंगत और बाजार मूल्य के अनुरूप मुआवजा प्रदान करे।

अब यह मामला केवल भूमि अधिग्रहण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि किसानों के अधिकार, आजीविका और उचित मुआवजे की मांग का मुद्दा बन गया है। क्षेत्र के लोगों की निगाहें प्रशासन और सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

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