लद्दाख के इकोसिस्टम को बचाने के लिए एलजी की बड़ी पहल, पर्यावरण संरक्षण बल में तैनात हुए 100 पूर्व सैनिक

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पहली बार लद्दाख के नाज़ुक पर्यावरण की सुरक्षा के लिए ‘पर्यावरण संरक्षण बल’ (EPF) में 100 पूर्व सैनिकों को तैनात किया गया है। ये EPF कर्मी वन्यजीवों की रक्षा करेंगे और लद्दाख के शुद्ध पर्यावरण को बचाए रखने में अपनी अहम भूमिका निभाएंगे।
लेह: लद्दाख के नाज़ुक पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) को बचाने के लिए प्रशासन की ओर से एक बड़ी पहल की गई है। लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर (एलजी) विनय कुमार सक्सेना ने 100 पूर्व सैनिकों को नवगठित पर्यावरण संरक्षण बल (EPF) में तैनात किया।

किन इलाकों में होगी तैनाती?
सेना, अर्धसैनिक बलों और लद्दाख स्काउट्स के पूर्व सैनिकों को मिलाकर बनाए गए पर्यावरण संरक्षण बल (EPF) के कर्मियों को केंद्र शासित प्रदेश के पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील इलाकों में तैनात किया जाएगा। इनका काम अवैध ऑफ-रोडिंग की बढ़ती घटनाओं पर कड़ी नज़र रखना होगा। क्योंकि इस तरह की घटनाएं वन्यजीवों के लिए खतरा हैं और लद्दाख के पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती हैं। EPF को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए, इन पूर्व सैनिकों को अपने निर्धारित इलाकों में नियमों के उल्लंघन पर मौके पर ही चालान काटने का अधिकार दिया गया है।
क्यों शुरू हुई ये अनूठी पहल?
यह अनूठी पहल लद्दाख के पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील इलाकों में अवैध ऑफ-रोडिंग, संरक्षित क्षेत्रों के भीतर अनधिकृत कैंपिंग, वन्यजीवों को परेशान करने और प्रदूषण की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए शुरू की गई है। पूर्व सैनिकों की तैनाती का उद्देश्य पर्यावरण और वन्यजीव कानूनों के उल्लंघन के खिलाफ ठोस एक्शन लेना है। पर्यावरण संरक्षण बल को विशेष रूप से संरक्षित वन्यजीव क्षेत्रों के भीतर नियमों के उल्लंघन को रोकने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन उल्लंघनों में वन्यजीवों का पीछा करना और उन्हें परेशान करना, कचरा फैलाना, सिंगल-यूज़ प्लास्टिक का इस्तेमाल करना, खुले में प्लास्टिक का कचरा फेंकना और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली अन्य गतिविधियां शामिल हैं।

ईपीएफ को मिले ये विशेष अधिकार
बढ़ती अवैध ऑफ-रोडिंग और अनधिकृत कैंपिंग की घटनाओं को सख्ती से रोकने के लिए इस बल को विशेष अधिकार दिए गए हैं। अब ये पूर्व सैनिक नियमों का उल्लंघन करने वाले पर्यटकों और लोगों का मौके पर ही चालान काट सकेंगे। स्थानीय इलाकों की अच्छी समझ होने के कारण इनकी तैनाती इन्हीं के मूल क्षेत्रों में की गई है।
ईपीएफ जवानों को कितना वेतन मिलेगा?
पर्यावरण नियमों को सख्ती से लागू करने के साथ ही यह पहल पूर्व सैनिकों के पुनर्वास की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। इससे उन्हें रिटायरमेंट के बाद समाज सेवा का अवसर मिलेगा। पर्यावरण संरक्षण बल के प्रत्येक सदस्य को अपने मूल या निर्धारित इलाकों में तैनाती के दौरान 25,000 रुपये का मासिक वेतन मिलेगा। स्थानीय इलाके की जानकारी होने के कारण वे प्रभावी ढंग से निगरानी कर सकेंगे।

ये स्वच्छता व जैव-विविधता संरक्षण के एंबेसडर बनेंगे: एलजी
पूर्व सैनिकों को हरी झंडी दिखाते हुए एलजी वीके सक्सेना ने कहा, “लद्दाख दुनिया के सबसे नाज़ुक ऊंचाई वाले इकोसिस्टम में से एक है। यहां कई लुप्तप्राय प्रजातियां पाई जाती हैं जिन्हें कड़ी सुरक्षा की ज़रूरत है। बढ़ते टूरिज़्म के साथ हमारी पर्यावरणीय ज़िम्मेदारी भी बढ़ जाती है।” उन्होंने भरोसा जताया कि पूर्व सैनिकों के अनुशासन और ईमानदारी से लद्दाख में ज़िम्मेदार टूरिज़्म को बढ़ावा मिलेगा और वे स्वच्छता व जैव-विविधता संरक्षण के एंबेसडर बनेंगे।
एलजी ने दिलाई शपथ
एलजी ने EPF के जवानों को शपथ भी दिलाई, जिसमें उन्होंने लद्दाख के पर्यावरण, जंगलों, वन्यजीवों और जैव-विविधता की सुरक्षा में अपनी ज़िम्मेदारियों को ईमानदारी से निभाने का संकल्प दोहराया। EPF के हर सदस्य ने यह भी संकल्प लिया कि वे सिंगल-यूज़ प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं करेंगे और अपने परिवारों, दोस्तों और स्थानीय समुदायों को पर्यावरण के अनुकूल विकल्प अपनाने के लिए सक्रिय रूप से प्रोत्साहित करेंगे।

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