गोरखपुर में विवाहिता ने पति और ससुराल पक्ष पर लगाए गंभीर आरोप, तीन बच्चों संग जनता दरबार पहुंची, बोलीं- घर से निकाल दिया, खर्च तक नहीं देते

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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से एक विवाहिता द्वारा पति और ससुराल पक्ष पर घरेलू प्रताड़ना, मारपीट और घर से निकालने के गंभीर आरोप लगाए जाने का मामला सामने आया है। पीड़िता न्याय की मांग लेकर मुख्यमंत्री जनता दरबार पहुंची, जहां उसने अपने और अपने तीन बच्चों की सुरक्षा तथा भविष्य को लेकर गुहार लगाई। महिला का आरोप है कि पिछले कई महीनों से उसे लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है, जबकि उसके बच्चों की पढ़ाई और पालन-पोषण भी प्रभावित हो रहा है।

रामगढ़ताल थाना क्षेत्र के ग्राम लहसड़ी बरबसपुर निवासी चांदनी देवी पत्नी सुनील कुमार ने मुख्यमंत्री को दिए गए प्रार्थना पत्र में बताया कि उसकी शादी लगभग 15 वर्ष पहले हुई थी। उनके तीन बच्चे हैं। विवाहिता का कहना है कि शादी के बाद से ही पति सुनील कुमार, सास विद्यावती, ससुर और देवर मोनू द्वारा आए दिन मारपीट, गाली-गलौज और मानसिक प्रताड़ना की जाती रही। आरोप है कि परिवार के लोग न तो उसका खर्च उठाते हैं और न ही बच्चों की परवरिश के लिए कोई आर्थिक सहायता देते हैं।

चांदनी देवी ने बताया कि उनके पति पहले बढ़ई का काम करते थे, लेकिन पिछले छह-सात महीनों से कोई काम नहीं कर रहे हैं और घर पर ही रहते हैं। इसी दौरान घरेलू विवाद लगातार बढ़ता गया। महिला का आरोप है कि सास और पति अक्सर छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा करते, अपमानित करते और घर से निकाल देने की धमकी देते थे।

पीड़िता के अनुसार, नौ जुलाई को उसे तीनों बच्चों सहित घर से बाहर निकाल दिया गया। इसके बाद वह अपने मायके चली गई। कुछ दिन बाद बच्चों की पढ़ाई और भविष्य को ध्यान में रखते हुए वह दोबारा ससुराल पहुंची, लेकिन आरोप है कि वहां भी उसके साथ मारपीट की गई और उसे फिर से घर से भगा दिया गया।

महिला का कहना है कि परिवार के पास रहने के लिए मकान, दुकान और अन्य सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद उसे और उसके बच्चों को उनके अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है। उसका आरोप है कि जानबूझकर उसे घर से बाहर कर दिया गया ताकि वह अपने वैवाहिक अधिकारों से वंचित हो जाए।

चांदनी देवी ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर पति और ससुराल पक्ष के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही उसे और उसके बच्चों को सुरक्षा, भरण-पोषण तथा रहने का अधिकार दिलाया जाए ताकि बच्चों की पढ़ाई और भविष्य प्रभावित न हो।

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