पीड़ित पक्ष ने पुलिस अधीक्षक चन्दौली को प्रार्थना पत्र देकर गंभीर आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है। मामले को लेकर गांव में चर्चा तेज हो गई है।
मिली जानकारी के अनुसार मुड्डा गांव निवासी राजवंश पाल ने पुलिस अधीक्षक को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि गांव की ही रहने वाली लीलावती देवी के साथ करीब 10 फीट गली को लेकर पुराना विवाद चल रहा है। इसी रंजिश के चलते विपक्षी पक्ष ने वर्ष 2023 में उनके खिलाफ फर्जी मेडिकल रिपोर्ट तैयार कराकर धारा 354, 323, 325, 504 और 506 के तहत मुकदमा दर्ज कराया था।
राजवंश पाल का आरोप है कि उस समय उन्होंने भी घटना की शिकायत थाना कन्दवा में की थी, लेकिन पुलिस द्वारा उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। पीड़ित का कहना है कि लगातार विवाद और मुकदमेबाजी के कारण उनके परिवार को मानसिक और सामाजिक रूप से काफी नुकसान उठाना पड़ा।
राजवंश पाल का आरोप है कि लीलावती देवी और उनका परिवार लगातार उन्हें गांव छोड़ने की धमकी दे रहा है। आरोप है कि लीलावती देवी अक्सर यह कहकर दबाव बनाती हैं कि उनका बेटा कृष्णकांत पाल का बेटा अग्निवीर पुलिस में भर्ती हो चुका है और उसके प्रभाव के दम पर लीलाऊती देवी फर्जी मुकदमे में फंसा सकती हैं। इतना ही नहीं, परिवार का आरोप है कि कृष्णकांत पाल जो भी खुलेआम धमकी देता है कि अगर उन्होंने गांव नहीं छोड़ा तो उन्हें झूठे मामलों में फंसा दिया जाएगा और उनका जीवन बर्बाद कर दिया जाएगा।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि फर्जी मुकदमे में उनके 83 वर्षीय पिता सीताराम को भी घसीटा गया, जिससे वह गहरे सदमे में आ गए और बाद में उनकी मृत्यु हो गई। परिवार का आरोप है कि इस पूरे घटनाक्रम ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया।
राजवंश पाल ने अपने प्रार्थना पत्र में एक और गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि बीते 20 अप्रैल 2026 को उनकी पुत्री के साथ भी जानलेवा घटना हुई। आरोप है कि विपक्षी महिला ने उनकी पुत्री का गला दबाकर हत्या करने का प्रयास किया। पुत्री के शोर मचाने पर गांव के लोग मौके पर पहुंचे, जिसके बाद उसकी जान बच सकी।
पीड़ित परिवार का कहना है कि विपक्षी पक्ष लगातार उन्हें गांव छोड़ने की धमकी देता है और कहता है कि उनका प्रभाव पुलिस तक है, इसलिए वह किसी को भी झूठे मुकदमे में फंसा सकती है। परिवार ने आरोप लगाया कि इस तरह की धमकियों से पूरा परिवार भय और तनाव में जीने को मजबूर है।
राजवंश पाल ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और आरोपित महिला के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
फिलहाल पुलिस अधीक्षक कार्यालय में प्रार्थना पत्र दिए जाने के बाद अब सभी की नजर पुलिस कार्रवाई पर टिकी है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला गांव में लंबे समय से चल रहे विवाद की गंभीर तस्वीर सामने ला सकता है। वहीं दूसरी ओर पुलिस जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
