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बिना नाम, फिर भी कार्रवाई! लूट केस की ‘डायरी’ बताकर गरीब परिवार को पुलिस की कथित प्रताड़ना

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मुजफ्फरपुर जिले के मीनापुर थाना क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां कथित तौर पर पुलिस की कार्रवाई ने एक गरीब परिवार की जिंदगी को संकट में डाल दिया है। मीनापुर निवासी 25 वर्षीय सुलेखा कुमारी ने आरोप लगाया है कि उनके पति अनिल कुमार को एक ऐसे लूटपाट के मामले में फंसाया जा रहा है, जिसमें उनका नाम कहीं दर्ज ही नहीं है।

सुलेखा कुमारी की शादी को पांच साल हो चुके हैं और वे तीन छोटे बच्चों की मां हैं। उनका कहना है कि पिछले करीब एक महीने से पुलिसकर्मी बार-बार उनके घर के चक्कर काट रहे हैं और यह कहकर परेशान कर रहे हैं कि उनके पति का नाम थाने की डायरी में लूट के एक मामले में लिखा हुआ है। इस डर और दबाव के बीच पूरा परिवार मानसिक तनाव में जीने को मजबूर है।

पीड़िता के अनुसार, जब उन्होंने सच्चाई जानने के लिए आधिकारिक तौर पर रिकॉर्ड निकलवाया तो उसमें उनके पति अनिल कुमार का नाम कहीं भी दर्ज नहीं मिला। इसके बावजूद पुलिसकर्मी लगातार यही दोहराते रहे कि “डायरी में नाम लिखा है” और इसी आधार पर उन्हें डराया जा रहा है। सुलेखा का आरोप है कि यह दबाव बिना किसी ठोस सबूत के बनाया जा रहा है।

सुलेखा कुमारी बताती हैं कि जब वे अपने पति के साथ थाने जाकर स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश करती हैं तो उन्हें बड़े बाबू से मिलने तक नहीं दिया जाता। हर बार उन्हें टाल दिया जाता है या फिर डराने वाले लहजे में बात की जाती है। एक गरीब परिवार होने के कारण उनके पास न तो कोई मजबूत पहुंच है और न ही कानूनी लड़ाई लड़ने के पर्याप्त संसाधन।

एक महीने से जारी इस कथित पुलिसिया दबाव ने परिवार की रोजमर्रा की जिंदगी को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। बच्चों की परवरिश, घर की जिम्मेदारी और लगातार बनी अनिश्चितता ने सुलेखा को अंदर तक तोड़ दिया है। उनका कहना है कि अगर उनके पति निर्दोष हैं और रिकॉर्ड में नाम नहीं है, तो फिर उन्हें इस तरह क्यों परेशान किया जा रहा है।

अब सवाल यह उठता है कि आखिर बिना आधिकारिक रिकॉर्ड के किस आधार पर किसी परिवार को डराया जा सकता है। पीड़ित परिवार ने निष्पक्ष जांच और उच्च अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और उन्हें इस कथित प्रताड़ना से राहत मिल सके।

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