फरीदपुर तहसील के ग्राम सरेंदा निवासी 106 वर्षीय बुजुर्ग किसान रामसिंह पिछले करीब 14 वर्षों से अपनी पुश्तैनी जमीन पर हक पाने के लिए तहसील और प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिल सका है। बुजुर्ग किसान की पीड़ा और लगातार प्रशासनिक उपेक्षा का मामला अब इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।
मिली जानकारी के अनुसार ग्राम सरेंदा स्थित गाटा संख्या 125, रकबा 0.834 हेक्टेयर कृषि भूमि में रामसिंह पुत्र गिरवर सिंह सहखातेदार हैं और भूमि में उनका वैधानिक हिस्सा दर्ज है। रामसिंह का आरोप है कि वर्ष 2012 से गांव के ही सहखातेदार तौलेराम ने उनके हिस्से की जमीन पर कब्जा कर रखा है और लगातार खेती कर रहा है। इस दौरान कई बार गेहूं और अन्य फसलें बोकर उत्पादन भी लिया गया, लेकिन प्रशासन की ओर से कब्जा हटवाने की कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
पीड़ित बुजुर्ग किसान का कहना है कि उन्होंने बीते 14 वर्षों में दर्जनों बार तहसीलदार, राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन के समक्ष शिकायतें दर्ज कराईं। हर बार उन्हें केवल आश्वासन देकर वापस भेज दिया गया कि जल्द ही कार्रवाई होगी, लेकिन मामला जस का तस बना हुआ है। अब वर्ष 2026 में भी वही स्थिति बनी हुई है और आरोपी पक्ष खेत में गेहूं की फसल खड़ी कर कब्जा जमाए हुए है।
रामसिंह ने आरोप लगाया कि जब भी वह अपनी जमीन पर अधिकार जताने या फसल की बात करने जाते हैं तो विपक्षी पक्ष दबंगई दिखाता है और उन्हें धमकाकर भगा देता है। उनकी उम्र अधिक होने के कारण वह शारीरिक और मानसिक रूप से भी काफी परेशान हैं। उनका कहना है कि जीवन के इस अंतिम पड़ाव में वह सिर्फ अपना वैधानिक हक चाहते हैं।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह विवाद गांव में लंबे समय से चल रहा है और कई बार पंचायत स्तर पर भी मामला सुलझाने की कोशिश हुई, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि भूमि विवादों में प्रशासनिक देरी के कारण दबंग लोगों के हौसले बढ़ते जा रहे हैं और कमजोर वर्ग के लोग न्याय के लिए भटकने को मजबूर हैं।
रामसिंह ने एक बार फिर थाना फतेहगंज पूर्वी और तहसील प्रशासन को लिखित शिकायत देकर मांग की है कि उनकी जमीन की पैमाइश कराकर कब्जा मुक्त कराया जाए और अवैध रूप से खेती कर रहे व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन 106 वर्षीय बुजुर्ग किसान की इस वर्षों पुरानी पीड़ा को कब गंभीरता से लेकर न्याय दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाता है, या फिर उन्हें इसी तरह दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ेंगे।

