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सूरत में बारिश बनी आफत, नाले का पानी घुसने से लेडीज गारमेंट्स का गोदाम जलमग्न, भारी नुकसान का दावा

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विशेष संवाददाता कंचन की रिपोर्ट

सूरत। गुजरात के सूरत शहर में 7 जुलाई को हुई मूसलाधार बारिश ने व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। डिंडोली क्षेत्र के मौर्य नगर में स्थित एक लेडीज गारमेंट्स कारोबारी के गोदाम में बारिश और नाले का पानी घुस जाने से भारी नुकसान होने का मामला सामने आया है। कारोबारी हेमाराम ने आरोप लगाया है कि गोदाम के पास स्थित नाले का पानी सीधे उनके गोदाम में भर गया, जिससे बड़ी मात्रा में रखा माल खराब हो गया। उन्होंने प्रशासन से नुकसान का आकलन कर राहत और स्थायी समाधान की मांग की है।

हेमाराम, जो गजान क्रिएशन के नाम से सूट, कुर्ता, पैंट और लेडीज गारमेंट्स का कारोबार करते हैं, ने बताया कि उनका प्रतिष्ठान मौर्य नगर, बाबा मेमोरियल हॉस्पिटल के सामने, डिंडोली, सूरत में स्थित है। उनके अनुसार 7 जुलाई को हुई तेज बारिश के दौरान नाले का जलस्तर अचानक बढ़ गया और गंदा पानी उनके गोदाम में घुस गया। इससे गोदाम में रखा बड़ी मात्रा में तैयार और स्टॉक किया गया गारमेंट्स का सामान भीग गया, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

व्यवसायी ने बताया कि वह पिछले करीब 45 वर्षों से व्यापार से जुड़े हुए हैं, जबकि वर्तमान स्थान पर बना उनका गोदाम पिछले तीन से चार वर्षों से संचालित हो रहा है। उनका कहना है कि इस बार जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह विफल रही, जिसके कारण नाले का पानी सीधे गोदाम में भर गया। उनका आरोप है कि यदि समय पर नालों की सफाई और उचित जल निकासी की व्यवस्था होती तो इतना बड़ा नुकसान नहीं होता।

हेमाराम के अनुसार बारिश के बाद गोदाम में भरे पानी और कीचड़ को निकालने में काफी समय और मेहनत लगी। पानी में भीगने से बड़ी मात्रा में गारमेंट्स खराब हो गए और कारोबार भी प्रभावित हुआ। उनका कहना है कि छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए इस प्रकार का नुकसान आर्थिक रूप से बेहद भारी साबित होता है।

पीड़ित कारोबारी ने स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि क्षेत्र की जल निकासी व्यवस्था को मजबूत किया जाए, नालों की नियमित सफाई कराई जाए तथा बारिश से प्रभावित व्यापारियों को उचित राहत और मुआवजा दिया जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो हर मानसून में व्यापारियों को इसी तरह नुकसान झेलना पड़ेगा।

समाचार लिखे जाने तक संबंधित विभाग की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। मामले में प्रशासनिक जांच और नुकसान का वास्तविक आकलन किया जाना शेष है।

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