राजसमंद: ग्राम पंचायत पनोतिया में बड़ा पट्टा घोटाला!

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चारागाह और खेल मैदान की जमीन पर अवैध आवासीय पट्टेसरपंच–सचिव पर गंभीर आरोप

राजसमंद जिले की पनोतिया ग्राम पंचायत में बीते एक दशक (2014 से 2024) के दौरान आवासीय पट्टों में व्यापक धांधली का सनसनीखेज मामला सामने आया है। ग्रामीण मुन्ना शाह ने जिला कलेक्टर एवं PCPLC को शिकायत सौंपकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। आरोपों में सीधे सरपंच व सचिव पर चारागाह एवं खेल मैदान की जमीन को खुर्द-बुर्द करने और अवैध तरीके से पट्टे जारी करने का आरोप है।

चारागाह और खेल मैदान की जमीन को बना दिया आवासीय क्षेत्र!

शिकायतकर्ता मुन्ना शाह ने अपने आवेदन में आरोप लगाया कि—

ग्राम पंचायत पनोतिया ने आराजी नंबर 315, जो कि चारागाह भूमि एवं खेल मैदान के रूप में दर्ज है, उस पर बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के अवैध तरीके से आवासीय पट्टे काट दिए।

पंचायत अधिकारियों ने सरकारी भूमि को निजी लाभ एवं राजनीतिक दबाव में बाँट दिया, जिससे सरकार को भारी राजस्व हानि हुई।

ग्रामीणों का कहना है कि चारागाह की भूमि पर वर्षों से पशुओं का चरना होता था और बच्चों का खेल मैदान भी इसी भूमि पर था, जिसे अब अवैध कब्जों में बदल दिया गया है।

गरीबों के नाम पर खेल — “निःशुल्क पट्टे” का भी दुरुपयोग!

मुन्ना शाह के अनुसार—

कई पट्टे ऐसे लोगों को जारी किए गए जो पात्र नहीं थे, जबकि वास्तविक गरीब एवं पात्र लाभार्थियों को दरकिनार कर दिया गया।

अनेक पट्टे पुश्तैनी और मनमर्जी से जारी किए गए, जिसका रिकॉर्ड पंचायत में पारदर्शी तरीके से उपलब्ध भी नहीं है।

इससे पंचायत के भीतर बड़े स्तर पर धांधली, मिलीभगत और भ्रष्टाचार का संकेत मिलता है।

कलेक्टर से उच्च स्तरीय कमेटी जांच की मांग

आवेदनकर्ता ने जिला कलेक्टर से मांग की है कि—

पूरे 10 साल के पट्टा वितरण की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।

दोषी सरपंच, सचिव और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

ग्राम की सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कर सरकार के नाम दर्ज किया जाए।
ग्रामीणों में आक्रोश — “गाँव की जमीन बेच दी गई”!

गाँव के कई ग्रामीणों ने भी आरोपों की पुष्टि करते हुए कहा कि—

“चारागाह और खेल मैदान जैसी सामुदायिक भूमि हमारी पीढ़ियों की संपत्ति है। इसे निजी फायदे के लिए बेचा गया है। प्रशासन को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।”

ग्रामवासियों में इस घोटाले को लेकर भारी नाराज़गी है और सबकी निगाहें अब प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।

अब प्रशासन क्या करेगा?

जिला प्रशासन द्वारा जाँच शुरू होने पर

कितने पट्टे अवैध पाए जाते हैं

किस अधिकारी ने मंजूरी दी

कितना राजस्व नुकसान हुआ

और कितनी भूमि बचाई जा सकती है

यह आने वाले दिनों में बड़ा मुद्दा बन सकता है।

राजसमंद जिले में यह मामला सबसे बड़े पट्टा भ्रष्टाचार घोटालों में से एक बन सकता है।

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